– विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर मानसिक स्वास्थ्य माह का आगाज- संवाद, संवेदनशीलता और समय पर सहयोग से बचाया जा सकता है जीवन
हनुमानगढ़। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) के तहत विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जिले में 10 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मानसिक स्वास्थ्य माह का शुभारंभ किया गया। इसी क्रम में बलिदानी योद्धा मेजर विकास भांभू मेडिकल कॉलेज, हनुमानगढ़ में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से विद्यार्थियों के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य आत्महत्या जैसे गंभीर विषय के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों की पहचान करने तथा उन्हें समय पर आवश्यक सहयोग एवं उपचार उपलब्ध करवाने के प्रति संवेदनशील बनाना रहा। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा, मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. कीर्ति शेखावत, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी सोलंकी, मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. काजल, डॉ. सुमन, डॉ. सुमनलता, डीआईसी मैनेजर सुनील शर्मा, डीपीओ अंजू बाला, त्रिलोकेश्वर शर्मा सहित मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक, स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला में सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनके विद्यार्थी जीवन में आने वाली चुनौतियों, तनाव और समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने तनावमुक्त रहने के लिए योग एवं मेडिटेशन को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष और तनाव आते रहते हैं, लेकिन उनका प्रभावी प्रबंधन करना आवश्यक है।

उन्होंने महिलाओं के संघर्ष और धैर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद महिलाएं परिवार को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या को मन में दबाने के बजाय परिवार, मित्रों और भरोसेमंद लोगों से संवाद कर समाधान की दिशा में आगे बढऩा चाहिए। सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 एवं 1800-891-4416 के बारे में जानकारी देते हुए मानसिक तनाव या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर विशेषज्ञों से परामर्श लेने की अपील की। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं भी इस हेल्पलाइन के माध्यम से काउंसलिंग करवाई है। उन्होंने कहा कि तनाव का सामना कर रहे प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यकता होने पर इस सुविधा का लाभ लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार राज-ममता कार्यक्रम के अंतर्गत मन-दर्पण कार्यक्रम के तहत मानसिक स्वास्थ्य माह के दौरान जिले में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें सोशल मीडिया गतिविधियां, प्रश्नोत्तरी, मैराथन, रैली, चित्रकला प्रतियोगिता, पोस्टर एवं बैनर निर्माण, नारा लेखन सहित विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। 15 सितंबर को जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारियों की ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी। साथ ही सरकारी कार्यालयों, कॉलेजों, स्कूलों, कोचिंग सेंटरों एवं लाइब्रेरी आदि में विशेषज्ञों द्वारा वर्कप्लेस स्ट्रेस मैनेजमेंट सहित मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर संवाद एवं विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। डॉ. ओ.पी. सोलंकी, डीएनओ, एनएमएचपी ने गेटकीपर ट्रेनिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार निराशा, अकेलापन, अत्यधिक तनाव या स्वयं को दूसरों पर बोझ समझने जैसी बातें गंभीर संकेत हो सकती हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हमारे आसपास कोई व्यक्ति मानसिक संकट से गुजर रहा है तो उसे अकेला छोडऩे के बजाय एक गेटकीपर की तरह उसकी देखभाल करनी चाहिए, उसकी मनोदशा को समझना चाहिए और उसे सकारात्मकता की ओर लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव के साथ नशे की समस्या भी व्यक्ति की परेशानियों को बढ़ा सकती है। ऐसे में समय रहते व्यक्ति की पहचान कर उसे उचित सहायता और उपचार से जोडऩा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता, संवाद और समय पर सहयोग से किसी व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान मेडिकल कॉलेज की डॉ. स्नेहलता एवं डॉ. सुमन ने पीपीटी के माध्यम से आत्महत्या से जुड़े मिथकों, इसके संभावित कारणों, चेतावनी संकेतों तथा बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति को उसकी समस्या को छोटा बताने या तुरंत सलाह देने के बजाय उसकी बात ध्यानपूर्वक और बिना किसी निर्णय के सुनना अधिक महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मदद मांगना कमजोरी नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों पर खुलकर बात करना, जरूरत पडऩे पर मनोवैज्ञानिक अथवा मनोचिकित्सकीय सहायता लेना और अपने आसपास मानसिक संकट से गुजर रहे व्यक्ति का साथ देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का मुख्य उद्देश्य आत्महत्या से जुड़े कलंक को कम करना तथा लोगों को यह संदेश देना है कि समय पर संवाद, संवेदनशीलता और सहायता से जीवन को बचाया जा सकता है।
