हनुमानगढ़। जंक्शन स्थित जिला कारागृह के सामने सेक्टर-11 बी में बना राजस्थान पर्यटन विभाग (आरटीडीसी) का हनुमानगढ़ जिले का एकमात्र होटल पिछले करीब 25 से 30 वर्षांे से बंद पड़ा है। समय के साथ यह भवन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो गया और लंबे समय तक नशेड़ियों एवं असामाजिक तत्वों का अड्डा बना रहा। हालांकि, हाल ही में पुलिस अधीक्षक की ओर से शुरू किए गए ‘सेफ सिटी अभियान’ के बाद यहां पुलिस की नियमित कार्रवाई से क्षेत्रवासियों ने राहत महसूस की है। सेक्टर-11 बी निवासी एवं पंजाब नेशनल बैंक से सेवानिवृत्त कर्मचारी रामप्रताप भरनावा ने बताया कि वह पिछले करीब 40 वर्षांे से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरटीडीसी होटल वर्षांे से बंद होने के कारण खंडहर बन चुका है। यहां दिन-रात नशेड़ी प्रवृत्ति के लोगों का जमावड़ा लगा रहता था और कई बार अनैतिक गतिविधियां भी होती थीं। नशा करने के बाद चोरी की घटनाओं से मोहल्लेवासी भय के साए में जीवन बिताने को मजबूर थे। होटल परिसर में लगे गेट, जंगले और अन्य लोहे के सामान तक चोरी हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि होटल को दोबारा शुरू कराने के लिए कई बार संबंधित विभाग को पत्र लिखे गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उनका कहना है कि नए पुलिस अधीक्षक बी आदित्य के कार्यभार संभालने के बाद शुरू किए गए सेफ सिटी अभियान से स्थिति में बदलाव आया है। पुलिस की टीम लगातार जर्जर भवनों की जांच कर रही है और पिछले एक सप्ताह में आरटीडीसी होटल परिसर से करीब 8 से 10 नशेड़ियों को पकड़ चुकी है। इसके बाद अब यहां नशेड़ियों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है और स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। स्थानीय निवासी प्रेम कुमार ने बताया कि नगर परिषद ने एक बार होटल परिसर को सीज कर गेट बंद किए थे, लेकिन असामाजिक तत्वों ने उन्हें तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि पहले शाम के समय महिलाओं, युवतियों और बच्चों का होटल के सामने से निकलना भी मुश्किल हो जाता था। नशेड़ी खुलेआम गाली-गलौज और हुड़दंग करते थे। अब पुलिस की नियमित गश्त से हालात में काफी सुधार आया है। मोहल्लेवासियों ने पुलिस की ओर से नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और नशे से अर्जित संपत्ति पर की जा रही कार्रवाई की भी सराहना की। साथ ही प्रशासन से मांग की कि वर्षांे से बंद पड़े इस आरटीडीसी होटल को या तो पूरी तरह ध्वस्त कर सुरक्षित व्यवस्था की जाए अथवा इसका जीर्णोद्धार कर दोबारा पर्यटन एवं आवास सुविधा के रूप में शुरू किया जाए, ताकि यह खंडहर बनने के बजाय जिले की उपयोगी संपत्ति बन सके।
