हनुमानगढ़। श्रीरामनवमी और हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर शहर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। टाउन-जंक्शन रोड स्थित श्रीसंपूर्ण बालाजी मंदिर में आयोजित सामूहिक सुंदरकांड पाठ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मंदिर परिसर में धूप-दीप की सुगंध, वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि, केसरिया पताकाओं की छटा और ‘जय श्रीराम-जय हनुमान’ के जयघोषों से श्रद्धा का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि भारतीय समाज आज भी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

सुंदरकांड के सामूहिक पाठ की शुरुआत विधि-विधान के साथ की गई। चौपाइयों की लयबद्ध ध्वनि जब एक साथ गूंजती, तो ऐसा प्रतीत होता मानो पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया हो। भजनों की मधुर धुनों ने श्रद्धालुओं के मन को शांति प्रदान की, वहीं जयघोषों ने भक्ति के भाव को और अधिक प्रखर बना दिया। श्रद्धालु पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ पाठ में सहभागी बने रहे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सुंदरकांड केवल एक काव्य-पाठ नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के परम भक्त महावीर हनुमान के साहस, शक्ति, अटूट भक्ति और निष्काम सेवा का प्रतीक है। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम तक पहुंचने का मार्ग हनुमान जी की कृपा से होकर जाता है। वे संकट मोचक हैं, जो हर संकट, भय और बाधा को दूर करने वाले माने जाते हैं। यही कारण है कि विभिन्न धार्मिक मंडलियों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस पाठ ने पूरे माहौल को राम और हनुमानमय बना दिया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर विश्वास, आंखों में आस्था और मन में प्रभु कृपा का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज की आध्यात्मिक शक्ति को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड हमें यह संदेश देता है कि सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण में निहित होती है। आज के समय में जब समाज भौतिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब राम और हनुमान के आदर्श हमें संयम, मर्यादा और कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं।

भाजपा नेता अमित चौधरी ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाली परंपरा है। सुंदरकांड जैसे आयोजन युवाओं को अनुशासन, सेवा और निस्वार्थ भाव का महत्व समझाते हैं। उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य पवित्र हो और मन में भक्ति हो, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।

विश्व हिंदू परिषद के पूर्व प्रांतीय संयोजक आशीष पारीक ने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और एकता को बढ़ाना भी है। जब समाज एक साथ बैठकर प्रभु का स्मरण करता है, तो आपसी भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं और सामाजिक समरसता को बल मिलता है।

वहीं विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. निशांत बतरा ने कहा कि सुंदरकांड जीवन के संघर्षों में धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। हनुमान जी का चरित्र यह संदेश देता है कि सेवा भाव और दृढ़ संकल्प से हर कठिनाई पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

सुंदरकांड पाठ के पश्चात भगवान श्रीराम और महावीर हनुमान की भव्य आरती की गई। आरती के दौरान दीपों की ज्योति, शंखनाद और भक्तों की भाव-विभोर उपस्थिति ने माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने समान भाव से सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी सहित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सेवा, संस्कार और सद्भाव की भावना को और अधिक मजबूत किया जा सके।
