भोपाल। प्रदेश में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुवार को रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में “कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड”, “सीएम किसान हेल्पलाइन” और “पैक्स सदस्यता वृद्धि अभियान” का शुभारंभ किया। कार्यशाला में प्रदेशभर से जिला, ब्लॉक, क्लस्टर और ग्राम पंचायत स्तर के 1027 से अधिक कर्मचारी शामिल हुए। कृषि, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, कृषि अभियांत्रिकी, बीज निगम और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसान कॉल सेंटर पर स्वयं कॉल कर इसकी कार्यप्रणाली का परीक्षण किया। उन्होंने एक सामान्य किसान की तरह प्रश्न पूछा, जिसका कॉल सेंटर कर्मचारी ने जवाब दिया और आगे संबंधित अधिकारियों द्वारा संपर्क किए जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसान कल्याण से जुड़े 16 विभागों को एक प्लेटफॉर्म पर लाना एक बड़ा और चुनौतीपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि लगभग हर विभाग किसी न किसी रूप में किसान हित से जुड़ा है, इसलिए सीमित दायरे में अधिकतम विभागों को शामिल करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने सिंचाई, लोक निर्माण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को भी किसान कल्याण से सीधे जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी और कृषि को परस्पर पूरक माना गया है, जबकि सहकारिता के अंतर्गत पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य गतिविधियों को जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी के खेती से दूर होने पर चिंता जताते हुए कहा कि आज अधिकांश युवा किसान बनने की इच्छा नहीं रखते, जो चिंताजनक है। कार्यक्रम में उन्होंने पशुपालन क्षेत्र में हो रही प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने “दूध क्रांति” का जिक्र करते हुए कहा कि इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधाओं और बिजली के विस्तार से अब खेती में व्यापक बदलाव आ रहे हैं और किसान साल भर उत्पादन कर पा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही नदी जोड़ो परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सिंचाई के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। कार्यक्रम में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, राज्य मंत्री लखन पटेल और नारायण सिंह पवार सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव निशांत बरबड़े ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस वर्ष को “कृषि कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर विभिन्न विभागों को एकीकृत कर किसानों के लिए साझा प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिससे सभी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान से मिल सकेगा। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि फल, सब्जी, दलहन-तिलहन, पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी जैसे क्षेत्रों के समन्वित विकास पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस तरह की कार्यशालाएं प्रशासनिक समन्वय बढ़ाने के साथ-साथ किसानों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने में सहायक सिद्ध होंगी।
