बांसवाड़ा। भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बांसवाड़ा और डूंगरपुर दौरे पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री की ‘ग्राम विकास चौपाल’ को जनता के साथ छलावा बताते हुए इसे एक सुनियोजित हाई-प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामा करार दिया। रोत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का दौरा अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक गया और ‘ग्राम विकास चौपाल’ एक “भजन मंडली” में बदल गई। उनका कहना है कि पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा पहले से इस तरह तैयार की गई थी ताकि सरकार आदिवासी बहुल दक्षिणी राजस्थान में खुद को गरीबों और आदिवासियों की हितैषी साबित कर सके। सांसद ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्यक्रम में ‘जनसुनवाई’ की वास्तविक भावना को खत्म कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि आम जनता को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी गई। रोत ने सवाल उठाया कि जब जनता ही कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकी, तो फिर यह कैसी जनसुनवाई और कैसी चौपाल? राजकुमार रोत ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम में भाजपा नेताओं को भी प्रवेश नहीं दिया गया। उनके अनुसार कई भाजपा नेताओं के पास तक नहीं बनाए गए, जिसके चलते उन्हें कार्यक्रम स्थल के बाहर ही रोक दिया गया। इससे पार्टी के भीतर भी नाराजगी देखी गई। पानी की समस्या को लेकर सांसद ने सरकार को घेरते हुए कहा कि वागड़ क्षेत्र के माही बांध और सोम-कमला-अम्बा बांध से पानी लिफ्ट कर जालोर सहित अन्य जिलों तक पहुंचाने के लिए लगभग 7 हजार करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। लेकिन यदि मुख्यमंत्री क्षेत्रीय लोगों को राहत देना चाहते हैं, तो कम लागत वाली 700 करोड़ की स्थानीय परियोजना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे सीधे वागड़ क्षेत्र की जनता को फायदा मिल सके। युवाओं से जुड़े मुद्दे पर भी सांसद ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा युवाओं और सोशल एक्टिविस्ट्स के लिए कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने से देशभर में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना गंभीर विषय है। रोत ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। भाजपा और कांग्रेस से जुड़े युवा भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा विषय बन चुका है और आने वाले समय में यह एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक बदलाव का संकेत साबित हो सकता है।
