सीकर। कृषि विभाग की डिकॉय टीम के कर्मचारियों के साथ मारपीट के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मुद्दे पर राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। डोटासरा ने कृषि विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए लिखा कि यदि छापेमारी करने वाली टीम के सदस्य ही कमीशनखोरी और सौदेबाजी में शामिल होंगे तो ऐसी कार्रवाई का क्या औचित्य रह जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के नाम पर डर दिखाकर वसूली की जा रही है, लेकिन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि डोटासरा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित कर दें तो वह मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह जीवनभर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहे हैं और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि 26 मई को ऑपरेशन डिकॉय के तहत सीकर और गोविंदगढ़ के RIICO क्षेत्र स्थित बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज पर छापा मारकर फंगस लगे मूंगफली के नकली बीज जब्त किए गए थे। साथ ही सेल स्टॉप की कार्रवाई कर मामला दर्ज कराया गया था। उनके अनुसार कार्रवाई के बाद डिकॉय टीम के सदस्य संदीप और रजनीश किसान बनकर अतिरिक्त जानकारियां जुटा रहे थे। मंत्री ने आरोप लगाया कि एक बीज व्यापारी को शक होने पर उसने साजिश रचकर टीम को एक स्थान पर बुलाया और पैसे मांगने का झूठा आरोप लगाते हुए 20-25 लोगों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि पुलिस और एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में व्यापारी के आरोप तथ्यहीन पाए गए हैं। दरअसल, कृषि विभाग की डिकॉय टीम को 3 जून को सूचना मिली थी कि बेंगलुरु में पंजीकृत ‘बसंत सीड्स’ कंपनी के नाम से सीकर में पैकिंग कर पॉलीहाउस खीरे की खेती के लिए बीज बेचे जा रहे हैं। जानकारी जुटाने के लिए एग्रीकल्चर सुपरवाइजर रजनीश और संदीप सीकर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि 4 जून को विकास सीड्स के संचालकों ने दोनों कर्मचारियों को झंकार होटल में मिलने के लिए बुलाया, जहां उनके साथ मारपीट की गई और कथित रूप से उन्हें जबरन पुलिस के पास ले जाने का प्रयास किया गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसके बाद 5 जून को कृषि विभाग के कर्मचारी संदीप ने सदर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। वहीं विकास सीड्स से जुड़े रामलाल ने पुलिस को दिए परिवाद में आरोप लगाया कि दोनों व्यक्तियों ने खुद को कृषि मंत्री का ओएसडी बताकर कार्रवाई नहीं करने के बदले 20 लाख रुपये की मांग की थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
