– प्रत्येक किसान को 4 हजार रुपए और कृषि सखियों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह सहायता, ब्रह्माकुमारी संस्थान के सहयोग से किसानों व कृषि अधिकारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
हनुमानगढ़। जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले में कुल 45 कलस्टरों का निर्माण किया गया है। इन कलस्टरों में चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए अनुदान सहायता दी जा रही है। साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, इनपुट तैयार करने और रिकॉर्ड संधारण में सहयोग देने के लिए कृषि सखियों का चयन भी किया गया है। अब राज्य सरकार ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के साथ मिलकर किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण देने के लिए एमओयू किया है। कार्यालय संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार के कृषि अनुसंधान अधिकारी शस्य राजेन्द्र बेनीवाल ने बताया कि हनुमानगढ़ जिले में पिछले वर्ष से प्राकृतिक खेती के कलस्टर बनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत पिछली बार बजट घोषणा के अंतर्गत पांच कलस्टर तथा केन्द्र सरकार के माध्यम से 30 कलस्टर सहित कुल 35 कलस्टर संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा इस बार 10 नए कलस्टर बनाए गए हैं। इस प्रकार जिले में प्राकृतिक खेती के कुल 45 कलस्टर तैयार किए गए हैं। राजेन्द्र बेनीवाल ने बताया कि इन कलस्टरों में किसानों का चयन किया गया है। प्रत्येक किसान को 0.4 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के लिए 4 हजार रुपए की अनुदान सहायता राशि दी जा रही है। प्रत्येक कलस्टर में दो कृषि सखियों का चयन किया गया है। इन कृषि सखियों को भी राज्य और केन्द्र सरकार की ओर से 5 हजार रुपए प्रतिमाह अनुदान सहायता दी जा रही है। कृषि सखियां किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी इनपुट तैयार करने तथा खेती से संबंधित रिकॉर्ड का संधारण करने में सहयोग प्रदान करती हैं। इससे किसानों को प्राकृतिक खेती की प्रक्रिया समझने और उसे अपनाने में मदद मिलती है।
ब्रह्माकुमारी संस्थान के साथ किया एमओयू
प्राकृतिक खेती को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से ब्रह्माकुमारी संस्थान के साथ प्रशिक्षण आयोजित करवाने के संबंध में एमओयू किया गया है। इसके तहत किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे प्राकृतिक खेती की तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और बेहतर तरीके से लागू करने में सहायता मिलेगी। राजेन्द्र बेनीवाल ने बताया कि विभाग की ओर से किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले भी आयोजित किए जा चुके हैं। अब एमओयू के तहत प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली जल्द तैयार की जाएगी। इसके अनुरूप किसानों और विभागीय अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
रासायनिक उत्पादों के अधिक उपयोग से बिगड़ रहा मृदा स्वास्थ्य
कृषि अनुसंधान अधिकारी ने कहा कि जिले में प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों का रुझान धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ रासायनिक उत्पादों की मांग भी अधिक बनी हुई है। रासायनिक उत्पादों के अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती अपनाना जरूरी है, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे और भविष्य में टिकाऊ कृषि उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के साथ स्वस्थ भोजन और बेहतर कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। प्राकृतिक खेती को किसानों की जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।
