ऐलनाबाद। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने शून्यकाल के दौरान सड़कों के किनारे खड़े पेड़ों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि आए दिन वाहन पेड़ों से टकरा जाने के कारण गंभीर हादसे हो रहे हैं, जिनमें अनेक लोगों की जान जा रही है। उन्होंने हाल ही में रोहतक के घुसकानी गांव में हुए दर्दनाक हादसे का उल्लेख करते हुए बताया कि कार के पेड़ से टकराने से पांच युवकों की मौत हो गई थी, जिनमें से चार अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। चौटाला ने कहा कि विकसित देशों में सड़कों के किनारे पेड़ नहीं लगाए जाते, और जहां पेड़ होते हैं वहां पर्याप्त सुरक्षा बैरियर लगाए जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़कों के किनारे लगे पेड़ों की समय पर कटाई-छंटाई की जाए। साथ ही, जिन पेड़ों को हटाया जाए उनसे होने वाली आमदनी का आधा हिस्सा किसानों को दिया जाए और शेष राशि सड़कों के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट व हेजिंग विकसित करने पर खर्च की जाए। उनका कहना था कि हेजिंग लगाने से दुर्घटना की स्थिति में जान-माल का नुकसान कम होगा। उन्होंने पर्यावरण एवं लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री से मिलकर इस दिशा में ठोस योजना बनाने की मांग की।
मसानी बैराज में प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया
अर्जुन चौटाला ने दूसरा अहम मुद्दा धारूहेड़ा और रेवाड़ी के बीच नेशनल हाईवे पर स्थित मसानी बैराज से जुड़े प्रदूषण का उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान और रेवाड़ी के उद्योगों का प्रदूषित पानी बैराज में छोड़ा जा रहा है। पहले यह पानी सहाबी नदी में जाता था, लेकिन अब पूरा गंदा पानी मसानी बैराज में इकट्ठा हो रहा है, जिससे आसपास की उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है और स्थानीय लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार यमुना में, पंजाब सरकार घग्गर में और राजस्थान सरकार मसानी बैराज में गंदा पानी छोड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि हरियाणा को ‘डस्टबिन’ क्यों बनाया जा रहा है। चौटाला ने कहा कि जब किसान पराली जलाता है तो उस पर प्रतिबंध लगाया जाता है और मंडियों में फसल बेचने से रोका जाता है, लेकिन उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने मांग की कि राजस्थान सरकार और संबंधित उद्योगों पर जुर्माना लगाया जाए।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर जताई नाराजगी
प्रश्नकाल के दौरान अर्जुन चौटाला ने शिक्षा मंत्री से प्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पदों का जिलेवार और श्रेणीवार विवरण मांगा। उन्होंने यह भी पूछा कि इन रिक्त पदों को भरने की सरकार की क्या योजना है और तब तक छात्रों की पढ़ाई की क्या व्यवस्था की गई है। शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जताते हुए चौटाला ने कहा कि प्रस्तुत आंकड़े भ्रमित करने वाले हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक पृष्ठ पर प्रिंसिपल के 574 पद रिक्त बताए गए हैं, जबकि दूसरे पृष्ठ पर पीजीटी अध्यापकों को पदोन्नत कर इन पदों को भरे जाने की बात कही गई है। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देने की मांग की।
