हनुमानगढ़। राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ ने लंबित पदोन्नतियों और पंचायती राज अधिनियम के उल्लंघन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए 20 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया है। संघ ने इस संबंध में पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त को ज्ञापन भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के अनुसार ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग की पदोन्नतियां पिछले लगभग छह वर्षों से लंबित हैं। आरोप है कि विभाग द्वारा अन्य संवर्गों की पदोन्नति नियमों के विपरीत की जा रही है, जबकि ग्राम विकास अधिकारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने मार्च-अप्रैल 2025 में “पदोन्नति नहीं तो काम नहीं” आंदोलन शुरू किया था, जिसे 8 मई को राष्ट्रहित में स्थगित कर दिया गया था। संघ का कहना है कि पिछले दस महीनों में भी विभाग की ओर से पदोन्नतियों के संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते आंदोलन को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा संघ ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 8 का उल्लंघन करते हुए ग्राम सभाओं के आयोजन के लिए बार-बार अल्प समय में आदेश जारी किए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार सामान्य ग्राम सभा के लिए 15 पूर्ण कार्य दिवस तथा विशेष ग्राम सभा के लिए कम से कम तीन पूर्ण कार्य दिवस पहले एजेंडा जारी किया जाना अनिवार्य है, लेकिन विभाग ने 19 मार्च को आदेश जारी कर 20 मार्च को ही विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। संघ का कहना है कि इतने कम समय में ग्राम सभा के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार और मतदाताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करना संभव नहीं है। ऐसे में ग्राम सभाएं केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं और भविष्य में कानूनी जटिलताओं का सामना भी करना पड़ सकता है। ग्राम विकास अधिकारी संघ ने स्पष्ट किया है कि पंचायती राज अधिनियम के उल्लंघन के कारण 20 मार्च 2026 को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन नहीं किया जाएगा। साथ ही संघ ने चेतावनी दी है कि यदि पदोन्नतियों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो 23 मार्च 2026 को प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी तथा 8 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। संघ ने सरकार से मांग की है कि ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग की छह वर्षों से लंबित पदोन्नतियां शीघ्र कराई जाएं और भविष्य में ग्राम सभाओं के आयोजन के लिए पंचायती राज अधिनियम 1994 के प्रावधानों के अनुसार ही आदेश जारी किए जाएं।
