हनुमानगढ़। ग्राम पंचायत 31 एसएसडब्ल्यू के ग्रामीणों ने गांव में प्रस्तावित पीडब्ल्यूएमयू (ठोस कचरा प्रबंधन) प्लांट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्राम पंचायत प्रशासक गुरप्रीत सिंह मान और पंचायत समिति डायरेक्टर करण सिंह गोदारा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मंगलवार को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्लांट को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह प्लांट गांव के प्रसिद्ध करणी माता मंदिर के समीप लगाया जा रहा है, जिससे धार्मिक आस्था और पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ज्ञापन में बताया गया कि करणी माता मंदिर क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां हर वर्ष विशाल मेला आयोजित होता है। इस मेले में न केवल पूरे राजस्थान बल्कि अन्य राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के पास कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित होने से न केवल श्रद्धालुओं को असुविधा होगी, बल्कि क्षेत्र की स्वच्छता और पवित्रता भी प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित पीडब्ल्यूएमयू प्लांट में लगभग 30 गांवों का कचरा एकत्रित किया जाएगा, जिससे बदबू, गंदगी और प्रदूषण की समस्या बढ़ेगी। इससे आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर बैठक कर सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव का विरोध किया जा चुका है और इसका लिखित प्रस्ताव भी पारित किया गया है। प्रशासक गुरप्रीत सिंह मान ने बताया कि गांव की जनता इस निर्णय से आहत है और प्रशासन को चाहिए कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्लांट के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन करे। पंचायत समिति डायरेक्टर करण सिंह गोदारा ने भी कहा कि धार्मिक स्थल के समीप इस प्रकार की योजना लागू करना उचित नहीं है और इससे सामाजिक व धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। पूर्व सरपंच दयाराम गोदारा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की बात कही, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि गांव की आस्था और स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस मौके पर माया देवी, नत्थूराम स्वामी, रमेश गोदारा, रोहिताश गोदारा, जयदेव गोदारा, सेवक सिंह, संदीप गोदारा, हेतराम वर्मा, राजेन्द्र घोड़ेला, साहबराम बावरी, देवीलाल, सतपाल सिंह मान व अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
