लखनऊ। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में ‘जंगलराज’ की स्थिति है, जहां अपराधियों पर कार्रवाई जाति के आधार पर की जा रही है। मौर्य ने कहा कि प्रदेश में अपराधी बेखौफ हैं और विशेष जातियों से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों पर तत्काल कठोर कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने कौशांबी, देवरिया, कानपुर, हरदोई और गाजीपुर जिलों में हाल ही में युवतियों की हत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार और संबंधित जिलों के पुलिस कप्तानों से सवाल किया कि इन मामलों में अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा, “अगर किसी एक भी अपराधी पर ऐसी कार्रवाई हुई हो जो समाज में नजीर बने, तो सरकार उसे सार्वजनिक करे।” मौर्य के अनुसार, कानून का समान रूप से पालन नहीं हो रहा, जिससे आम जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। हरदोई की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे पुलिस विभाग की लापरवाही और विफलता का परिणाम बताया। मौर्य ने आरोप लगाया कि मल्लावां थाने के इंस्पेक्टर और जिले के पुलिस अधीक्षक ने पीड़िता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। पीड़िता लगातार आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती रही, लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, जिसके चलते उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। “महिला सशक्तीकरण और आरक्षण की बात करने वाली सरकार में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है। बातें बड़ी-बड़ी की जाती हैं, लेकिन धरातल पर हालात बिल्कुल अलग हैं,” उन्होंने कहा। मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि जब उनके कार्यकर्ता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताते हुए कहा कि प्रदेश में अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि पीड़ितों की आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है। अंत में उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार बुल्डोजर कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन ऐसे गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों पर अब तक वैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि कानून का पालन बिना भेदभाव के किया जाए और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
