– राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत का 33वां जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन शुरू- ओपीएस, तबादले, डीपीसी और नियमित भर्ती के मुद्दे उठे
हनुमानगढ़। राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत का 33वां जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन शुक्रवार को जाट भवन, जंक्शन में जिलाध्यक्ष जगनंदन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। सम्मेलन में शिक्षक संगठन के इतिहास, शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की समस्याओं, सार्वजनिक शिक्षा के समक्ष मौजूद चुनौतियों तथा विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मंथन किया गया। सम्मेलन में शिक्षक हितों के साथ सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने से जुड़े 19 सूत्रीय मांगपत्र पर भी चर्चा की गई। सम्मेलन के मुख्य वक्ता एसटीएफआई के संस्थापक सदस्य वकील सिंह ने शिक्षक संगठन के इतिहास, विकास, महत्व और वर्तमान चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने शिक्षा पर घटती बजटीय हिस्सेदारी तथा बंद होते विद्यालयों से बढ़ती आर्थिक विषमता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। सह वक्ता अखिल भारतीय किसान सभा के तहसील अध्यक्ष चरणप्रीत सिंह बराड़ ने मानव विकास में वैज्ञानिक चेतना के महत्व पर जोर देते हुए शिक्षकों से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की अपील की। मुख्य अतिथि डाइट प्राचार्य मधुबाला ने सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सहयोग करने तथा आदर्श शिक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाने की बात कही।

विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य राकेश ढाका ने सार्वजनिक संस्थाओं को बचाने की अपील की। सभाध्यक्ष सतीश चोपड़ा एवं जिला मंत्री राम निवास ने राज्य सरकार से शिक्षक संघ की मांगों का समाधान करने की अपील की। सम्मेलन में सेवानिवृत्त शिक्षक नेता बृजलाल छिंपा, मनोहर बिश्नोई, साहबराम भादू, नौरंग भारती, हरदीप रमाणा, मनोहर लाल बंसल, प्राचार्य हरलाल ढाका सहित जिले के विभिन्न विद्यालयों से शिक्षकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दूसरे दिन शिक्षक-शिक्षार्थी हित में विभिन्न निर्णय लेकर प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे, जिन्हें राज्य कमेटी को भेजा जाएगा। राज्य कमेटी इन प्रस्तावों को समेकित कर मांगपत्र में शामिल करेगी।
तबादले, डीपीसी और टीईटी से जुड़ी मांगें
सम्मेलन में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण पर लगी रोक हटाने और सभी संवर्गांे के लिए स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की गई। अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा संस्कृत शिक्षा विभाग में 2012 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग रखी गई। न्यायालय में लंबित प्रकरणों का निस्तारण कर सभी बकाया डीपीसी पूरी करने तथा 1 अप्रैल 2026 तक की बकाया डीपीसी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने की मांग की गई। पदोन्नति के बाद काउंसलिंग में सभी रिक्त पद प्रदर्शित करने और दो वर्ष से कम सेवाकाल वाले शिक्षकों को वरीयता देने की मांग भी उठी। सम्मेलन में ‘पे प्रोटेक्शन’ के नाम पर प्रदेशभर में हो रही कथित वित्तीय वसूली पर रोक लगाने, शैक्षिक कैलेंडर को व्यावहारिक बनाने, ग्रीष्मकालीन अवकाश पूर्ववत लागू करने तथा नया शैक्षिक सत्र 1 जुलाई से शुरू करने की मांग की गई।
