हनुमानगढ़। शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के समग्र विकास में मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सैक्रेड हार्ट विद्यालय, हनुमानगढ़ जंक्शन के विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा के पश्चात अपने अवकाश समय का सदुपयोग करते हुए “सामाजिक अंतर्नोद (सोशल ड्राइव)” कार्यक्रम के अंतर्गत एक प्रेरणादायी सामाजिक गतिविधि का आयोजन किया। विद्यालय के शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने स्थानीय वृद्धाश्रम का भ्रमण किया तथा नव ज्योति सेवा विकलांग संस्थान पहुंचकर जरूरतमंदों को आवश्यक सामग्री वितरित की। इस दौरान विद्यार्थियों ने वहां रह रहे बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जीवन परिस्थितियों को करीब से देखा, समझा और उनसे आत्मीय संवाद भी किया। बुजुर्गों के साथ बिताए गए इन पलों में बच्चों ने उन्हें अपनेपन का भाव दिया और बदले में उन्हें स्नेह, आशीर्वाद और जीवन के अनुभवों की अमूल्य सीख प्राप्त हुई। विद्यार्थियों ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए बताया कि वे अपने माता-पिता द्वारा उपलब्ध कराई गई जरूरत की वस्तुएं यहां के निवासियों को भेंट कर अत्यंत संतोष का अनुभव कर रहे हैं। इस अवसर पर बच्चों ने कहा कि समाज में ऐसे वृद्धाश्रम खुलने की नौबत नहीं आनी चाहिए, क्योंकि अपने परिवार से दूर रहना किसी भी बुजुर्ग के लिए पीड़ादायक होता है।

बच्चों के अनुसार बुजुर्गों का सम्मान और देखभाल प्रत्येक परिवार की जिम्मेदारी है। भ्रमण के बाद विद्यार्थियों ने अपने अनुभवों को अपनी दैनंदिनी में भी लिखा और भविष्य में अपने माता-पिता तथा बड़ों का सम्मान करने का संकल्प लिया। साथ ही उन्होंने अपने माता-पिता का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें सेवा और संवेदनशीलता का यह अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका मनप्रीत कौर एवं नेहा छाबड़ा ने विद्यार्थियों के मन में उठे अनेक प्रश्नों—जैसे “क्या”, “क्यों” और “कब”—का विस्तार से उत्तर देते हुए उन्हें सामाजिक वास्तविकताओं से अवगत कराया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना ही एक सच्चे नागरिक की पहचान होती है। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नीना वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन एक रंगमंच की तरह है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभानी होती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दुःख स्थायी नहीं होते, बल्कि वे हमें कुछ सिखाने के लिए आते हैं। इसलिए हमें हर परिस्थिति में सकारात्मक रहना चाहिए और समाज में खुशियां बांटने का प्रयास करना चाहिए। विद्यालय द्वारा आयोजित यह सामाजिक पहल विद्यार्थियों के भीतर मानवीय मूल्यों, सहानुभूति और सेवा भाव को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित कराया, बल्कि उन्हें संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी।
