सूरतगढ़। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम (RVUNL) के वर्ष 1993-94, 1997-98, 2002-03 एवं 2005-06 बैच के तकनीकी कर्मचारियों ने तीन दशक से लंबित सेवा संबंधी मांगों के समाधान के लिए राज्य सरकार से तीन वर्षीय आईटीआई ट्रेनी प्रशिक्षण अवधि को नियमित सेवा (Qualifying Service) में शामिल करने की मांग की है। डॉ. अम्बेडकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति, एसटीपीएस सूरतगढ़ के अध्यक्ष बलीराम मेघवाल के नेतृत्व में ऊर्जा मंत्री, राजस्थान सरकार के नाम विस्तृत ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में कहा गया कि नियुक्ति के बाद कर्मचारियों से तीन वर्षों तक प्लांट एवं फील्ड में नियमित कर्मचारियों के समान तकनीकी एवं उत्पादन कार्य लिए गए। इस दौरान उन्हें उत्पादन प्रोत्साहन, विशेष उत्पादकता पुरस्कार, स्टाइपेंड में वार्षिक वृद्धि, आवास अथवा एचआरए, आकस्मिक अवकाश, निःशुल्क परिवहन जैसी सुविधाएं प्रदान की गईं। साथ ही उनके सीपीएफ की नियमित कटौती, नियोक्ता अंशदान जमा, वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने पर बिना किसी नई चयन प्रक्रिया के तकनीशियन ग्रेड-द्वितीय/तृतीय पद पर समायोजन किया गया। समिति का कहना है कि इसके बावजूद प्रशिक्षण अवधि को नियमित सेवा में शामिल नहीं किए जाने से कर्मचारियों की वरिष्ठता, वेतन निर्धारण, वार्षिक वेतनवृद्धि, चयन वेतनमान, पदोन्नति तथा पेंशन सहित अन्य सेवा लाभ प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए तीन वर्षीय प्रशिक्षण व्यवस्था समाप्त कर दो वर्षीय प्रोबेशन लागू किया गया तथा नियुक्ति तिथि से ही नियमित सेवा का लाभ दिया जाने लगा। इससे समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच केवल भर्ती वर्ष के आधार पर असमानता उत्पन्न हुई है, जिसे समिति ने संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया। समिति ने सरकार से मांग की है कि तीन वर्षीय प्रशिक्षण अवधि को Qualifying Service में शामिल कर वरिष्ठता, वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धि, चयन वेतनमान, पदोन्नति एवं पेंशन लाभों का पुनर्निर्धारण किया जाए। साथ ही सभी विद्युत निगमों में एक समान नीति लागू कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी पूर्वव्यापी लाभ प्रदान किए जाएं। ज्ञापन की प्रतिलिपियां मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री (वित्त), प्रमुख शासन सचिवों, लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग, मुख्य श्रम आयुक्त, RVUNL प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न कर्मचारी संगठनों तथा प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों को भी आवश्यक कार्रवाई एवं प्रकाशन के लिए भेजी गई हैं।
