– विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया जागरूकता का संदेश
हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया गया। इस वर्ष विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम ‘हृदय एवं रक्तवाहिका रोग तथा स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि की भूमिकाÓ रही। कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने फिजियोथेरेपी के महत्व, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक है। वहीं वैज्ञानिक फिजियोथेरेपी स्ट्रोक के बाद मरीजों की कार्यक्षमता, गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि फिजियोथेरेपी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं सक्रिय रखने के साथ चोट, बीमारी और विभिन्न शारीरिक समस्याओं के बाद पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस क्षेत्र में समर्पण, संवेदनशीलता और सेवा भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के एमडी दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण विभिन्न शारीरिक एवं हृदय संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में नियमित व्यायाम, शारीरिक गतिविधि और वैज्ञानिक फिजियोथेरेपी के माध्यम से स्वास्थ्य तथा जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवीनतम ज्ञान एवं तकनीकों से जुड़ते हुए अपने कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से फिजियोथेरेपी के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली और पुनर्वास में इसकी भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। खुशमन, स्वीटी, ज्योति, राहुल, गुरूशरण, अंशिका, दीपकनूर, अश्विनी एवं रूबल सहित अनेक विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में फैकल्टी के डीन डॉ. विजय कुमार, प्राचार्य जीआर शर्मा, विभागाध्यक्ष डॉ. नवजोत सिंह सहित संकाय सदस्य डॉ. चेतन्य गोदारा, डॉ. नितेश बंसल एवं डॉ. सरगम डांगे मौजूद रहे।
