हनुमानगढ़। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) ने शिक्षा विभाग की ओर से ग्रीष्मावकाश में कटौती किए जाने के निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अव्यावहारिक तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों के प्रतिकूल बताया है। संगठन का मानना है कि विभाग ने यह निर्णय राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों तथा जून के अंत तक पड़ने वाली भीषण गर्मी को नजरअंदाज करते हुए लिया है। यह फैसला विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी जोखिमपूर्ण है तथा शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात है। इसी प्रकार अन्य अवकाशों में भी विभाग की ओर से की गई मनमानी कटौती निंदनीय है। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के प्रदेशाध्यक्ष महावीर सिहाग तथा महामंत्री उपेन्द्र शर्मा ने कहा कि सरकार अपनी शैक्षिक विफलताओं को छिपाने के लिए शिक्षण समय बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर ऐसे निर्णय ले रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षिक कार्यांे से पूर्णतया मुक्त किया जाए। इसके साथ ही रिक्त पदों को नई नियुक्तियों और पदोन्नतियों के माध्यम से तुरंत भरा जाए। विद्यालयों में ऑनलाइन कार्यांे के लिए अलग से स्टाफ की व्यवस्था की जाए तथा शिक्षकों को मोबाइल आधारित अनावश्यक कार्यांे से मुक्त रखा जाए। प्रत्येक विद्यालय में सफाई कर्मी और सहायक कर्मचारी नियुक्त किए जाएं तथा पर्याप्त भौतिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। संघ के कोषाध्यक्ष राधेश्याम यादव तथा प्रवक्ता यादवेन्द्र शर्मा ने कहा कि शिक्षण कोई मशीनी कार्य नहीं है, इसलिए शिक्षकों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार बंद किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों को न्यायपूर्ण स्थानांतरण का अवसर प्रदान कर वर्षां से चली आ रही प्रताड़ना को समाप्त किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्था प्रधान के अधिकार क्षेत्र वाले अवकाशों को घटाकर मात्र एक दिन कर देना राज्य की सामाजिक एवं धार्मिक विविधता के प्रति सरकार और विभागीय अधिकारियों की असंवेदनशीलता का उदाहरण है। राज्य कर्मचारियों को एक वर्ष में दो दिन का ऐच्छिक अवकाश देय है जबकि पूर्व में ही शिक्षकों के इस अधिकार को संस्था प्रधान को प्रत्यायोजित कर दिया गया था, जिस पर अब कटौती कर दी गई है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के संघर्ष संयोजक पोखर मल ने मांग की है कि ग्रीष्मावकाश को पूर्ववत 15 मई से 30 जून तक यथावत रखा जाए, पूर्व में ग्रीष्मावकाश के दौरान विभाग की ओर से आदेशित कार्य दिवसों की नियमानुसार पीएल दी जाए तथा अन्य अवकाशों में की गई कटौती वापस ली जाए। संगठन की मांग है कि इन प्रतिगामी बदलावों को रद्द किया जाए और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाले सकारात्मक एवं प्रगतिशील कदम उठाए जाएं।
