जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने निकाय और पंचायत चुनावों में देरी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, महंगाई और नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र और राजस्थान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार चुनावी हार के डर से स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने से बच रही है, जबकि अदालत बार-बार चुनाव कराने के निर्देश दे चुकी है। पायलट ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक बार फिर 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन उन्हें आशंका है कि सरकार दोबारा अदालत का रुख कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव से डर रही है क्योंकि चुनाव होने पर उसकी वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी और कांग्रेस को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर सरकार को पहले भी अदालत की फटकार मिल चुकी है। इसके बावजूद न छात्रसंघ चुनाव कराए गए और न ही पंचायत व नगर निकाय चुनाव आयोजित किए गए। पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार नए-नए बहाने बनाकर चुनाव टाल रही है। सचिन पायलट ने कहा कि चुनाव नहीं होने के कारण राजस्थान को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। उनका दावा है कि स्थानीय निकायों के बोर्ड नहीं होने के कारण केंद्र से मिलने वाली हजारों करोड़ रुपये की राशि प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कभी गर्मी तो कभी रिपोर्ट लंबित होने जैसे कारण अदालत में पेश कर रही है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद लगातार ईंधन के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव के दौरान जनता से यह बात छिपाई और अब कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ सीधे आम लोगों पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। परिवहन से लेकर खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं तक सभी चीजें महंगी हो जाती हैं, लेकिन सरकार महंगाई पर ध्यान देने के बजाय केवल राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रही है। पायलट ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और बचत संबंधी अपीलों पर भी तंज कसते हुए कहा कि एक ओर जनता महंगाई से परेशान है, वहीं दूसरी ओर सरकार लोगों को तेल और अन्य चीजों में बचत करने की सलाह दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री जवाबदेही से बच रहे हैं और किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही है। पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि जो मंत्रालय और विभाग लगातार विफल हो रहे हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाए। नीट पेपर लीक मामले पर बोलते हुए पायलट ने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों की मेहनत पर इस तरह की घटनाएं पानी फेर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शिक्षा माफियाओं के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है और कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक का खुलासा सरकार या एजेंसियों ने नहीं, बल्कि छात्रों ने किया। छात्रों ने बताया कि गेस पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र में समानता है, जिसके बाद मामला सामने आया और शिकायतों के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। एनटीए पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा कि यह संस्था अब ‘नेशनल ट्रॉमा एजेंसी’ बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं और अब तक किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई है। पायलट ने कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है और जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रही।
