चारणवासी/फेफाना। स्थानीय कृषि उपज मंडी में गेहूं खरीद निर्धारित तिथि से 11 दिन की देरी से शनिवार को हड़बड़ी में शुरू की गई। पहले ही दिन महज 25 क्विंटल गेहूं की तुलाई हो सकी, जिससे किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली। मंडी गेट पर किसानों के धरने के बाद हरकत में आए मंडी प्रशासन ने औपचारिक रूप से खरीद का शुभारंभ तो किया, लेकिन व्यवस्थाओं के अभाव ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खरीद शुरू होने के मौके पर कृषि विपणन विभाग के डीडी विष्णु शर्मा, मंडी सचिव सीएल वर्मा, पीपीआई अश्विनी माथुर और क्वालिटी इंस्पेक्टर परेश्वर जाखड़ सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। उनके साथ क्षेत्र के प्रमुख किसान—भीमसेन ज्याणी, ओमप्रकाश गोदारा, संदीप बिजारणियां, शीशपाल सहारण, रियासत अली, रायसिंह, रोहिताश, जयसिंह, हरिसिंह, सत्यप्रकाश, देवीलाल, प्रदीप, ताराचंद, अरविंद, भजनलाल, बलवंत डूडी, रामप्रताप भांभू और अमरसिंह खीचड़ भी उपस्थित रहे।
फोटो सेशन तक सीमित रहे अधिकारी, संवाद से कतराए
किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने पहुंचे थे। गेहूं की ढेरियों के पास फोटो खिंचवाने के बाद वे बिना किसानों की समस्याएं सुने ही रवाना हो गए। किसानों का कहना है कि वे अपनी समस्याएं साझा करना चाहते थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
एक माह पहले घोषणा, फिर भी नहीं हुई तैयारी
मंडी में गेहूं खरीद केंद्र की घोषणा एक माह पहले हो चुकी थी, बावजूद इसके मंडी समिति द्वारा समय रहते कोई ठोस तैयारी नहीं की गई। न ही व्यापारियों और किसानों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। नतीजतन, किसानों को वीरान मंडी में अपनी फसल के ढेर लगाने पड़े। वर्तमान में मंडी परिसर में करीब 2 लाख थैलों में गेहूं खुले में पड़ा हुआ है।
बुनियादी सुविधाओं का टोटा, गर्मी में बेहाल किसान
मंडी में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। किसान अपने घरों से पानी लाने को मजबूर हैं। बैठने के लिए न छाया है और न ही तंबू की व्यवस्था। किसान या तो ट्रॉली के नीचे बैठते नजर आ रहे हैं या फिर व्यापारियों के निजी तंबुओं का सहारा ले रहे हैं।
रात में सुरक्षा पर सवाल, रोशनी का अभाव
मंडी में स्ट्रीट लाइटों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। केवल 5-7 बल्ब लगाकर औपचारिकता पूरी की गई है, जिनकी रोशनी में रात के समय गेहूं के ढेरों की निगरानी करना मुश्किल हो रहा है।
मौसम चेतावनी के बावजूद तिरपाल नहीं
मौसम विभाग द्वारा खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद मंडी प्रशासन ने गेहूं को ढकने के लिए तिरपाल की व्यवस्था नहीं की है। किसान खुद प्लास्टिक की चादरें लाकर अपनी फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
गंदगी से अटी मंडी, आवागमन में परेशानी
मंडी परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। स्थानीय लोगों द्वारा कूड़ा-करकट और गोबर डालने से हालात बदतर हो गए हैं। गंदगी के ढेरों के कारण किसानों को ट्रैक्टर-ट्रॉली घुमाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फेफाना मंडी में देरी से शुरू हुई गेहूं खरीद अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों का आक्रोश और बढ़ सकता है।
संवाददाता-जयलाल वर्मा
