लखनऊ। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता विवाद से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने 20 अप्रैल 2026 के उस आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए प्रार्थना पत्र दाखिल किया है, जिसमें न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने अपने आदेश में कहा था कि याची द्वारा सोशल मीडिया पर न्यायालय के संबंध में की गई टिप्पणियों को देखते हुए वह मामले की सुनवाई नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि प्रस्तावित अभियुक्त को भी सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद मामला न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ को आवंटित किया गया। बुधवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 अप्रैल के आदेश को वापस लेने संबंधी आवेदन पर वही पीठ निर्णय कर सकती है, जिसने मूल आदेश पारित किया था। अदालत ने कहा कि संबंधित अर्जी पर उचित पीठ के फैसले के बाद ही मामले को आगे सूचीबद्ध किया जाएगा। इधर, याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच संबंधी याचिका में स्वयं को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की है। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सुरक्षा संबंधी अनुरोध पर पुनर्विचार किया जा रहा है, हालांकि पहले पर्याप्त आधार न मिलने के कारण जेड प्लस सुरक्षा नहीं दी गई थी। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि याची की सुरक्षा के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल सरकारों और दिल्ली पुलिस को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पर न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने याचिका निस्तारित करते हुए उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द सुरक्षा मामले में निर्णय लेगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को गृह मंत्रालय को याचिकाकर्ता की सुरक्षा के लिए 24 घंटे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर की तैनाती सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। इससे पहले लखनऊ की एमपी-एमएलए अदालत ने 28 जनवरी 2026 को राहुल गांधी के खिलाफ ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े आरोपों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ एस. विग्नेश शिशिर ने 12 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने 17 फरवरी को याचिका स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। अब इस प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ करेगी। याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत रायबरेली के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी करने की मांग की है। याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। रायबरेली से सांसद और नेता प्रतिपक्ष होने के कारण यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब अदालत के आगामी फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
