ऐलनाबाद। डिजिटल युग में जहां तकनीक लोगों की सुविधाओं को बढ़ा रही है, वहीं साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। हरियाणा के सिरसा जिले में इन दिनों साइबर ठगों द्वारा फर्जी ट्रैफिक ई-चालान के माध्यम से लोगों को ठगने का नया तरीका सामने आया है। इसको लेकर सिरसा के पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने बताया कि साइबर अपराधी वाहन चालकों को ई-चालान के नाम पर फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजकर उन्हें जाल में फंसा रहे हैं। ये ठग मोबाइल मैसेज, व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए ऐसा संदेश भेजते हैं, जिसमें वाहन का नंबर, कथित चालान नंबर और चालान राशि जैसी जानकारी लिखी होती है। संदेश में यह भी लिखा जाता है कि यदि समय पर चालान जमा नहीं किया गया तो वाहन को सीज कर दिया जाएगा या भारी जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे संदेश देखकर कई लोग घबरा जाते हैं और बिना जांच-पड़ताल किए दिए गए लिंक पर क्लिक कर देते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही सरकारी वेबसाइट से मिलती-जुलती एक नकली वेबसाइट खुल जाती है, जहां चालान भरने के नाम पर लोगों से ऑनलाइन भुगतान करवाया जाता है। वास्तव में यह भुगतान सरकार के खाते में नहीं बल्कि साइबर ठगों के खाते में चला जाता है। एसपी दीपक सहारण ने बताया कि इन साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को ठगने के लिए https://echallanparivahan.in/ नाम की फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो असली वेबसाइट जैसी दिखती है। जबकि ट्रैफिक ई-चालान भरने के लिए सरकार की आधिकारिक वेबसाइट https://echallan.parivahan.gov.in/ है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को अपने वाहन का चालान चेक करना है या उसका भुगतान करना है, तो केवल आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही करें। उन्होंने बताया कि साइबर ठग लोगों का विश्वास जीतने के लिए संदेशों को बिल्कुल सरकारी नोटिस की तरह तैयार करते हैं। कई बार इन संदेशों में सरकारी लोगो, वाहन नंबर, चालान नंबर और राशि जैसी जानकारी भी लिखी होती है, जिससे लोग इसे वास्तविक समझ लेते हैं। इसी का फायदा उठाकर अपराधी लोगों से पैसे ठग लेते हैं।
इस तरह लोगों को बनाया जा रहा निशाना
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए कई तरीके अपना रहे हैं। सबसे पहले लोगों को डराने की रणनीति अपनाई जाती है। फर्जी मैसेज में लिखा होता है कि यदि चालान तुरंत नहीं भरा गया तो वाहन जब्त कर लिया जाएगा या भारी जुर्माना लगाया जाएगा। डर के कारण लोग जल्दबाजी में लिंक पर क्लिक कर देते हैं। दूसरा तरीका फर्जी लिंक भेजने का है। साइबर ठग एसएमएस, व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए एक लिंक भेजते हैं। इस लिंक पर क्लिक करने पर सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट खुल जाती है, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं और चालान भरने के नाम पर अपनी बैंक या कार्ड की जानकारी दर्ज कर देते हैं। तीसरा तरीका फर्जी हेल्पलाइन नंबर का होता है। कई बार संदेश में एक फोन नंबर भी दिया जाता है और लोगों से उस पर कॉल करने के लिए कहा जाता है। जब लोग उस नंबर पर कॉल करते हैं तो कॉल साइबर ठगों तक पहुंचती है। इसके बाद ठग सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर लोगों से ओटीपी, बैंक डिटेल्स या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते हैं और उनके साथ ठगी कर लेते हैं।
साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें सावधानी
एसपी दीपक सहारण ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के संदिग्ध मैसेज, ई-मेल या लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें। उन्होंने कहा कि यदि किसी मैसेज में चालान या किसी सरकारी नोटिस की बात कही गई हो तो घबराने की जरूरत नहीं है। पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही जानकारी की पुष्टि करें। उन्होंने कहा कि मैसेज या ई-मेल में आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। यदि गलती से लिंक खुल भी जाए तो उसमें अपनी कोई भी निजी जानकारी जैसे बैंक डिटेल्स, डेबिट-क्रेडिट कार्ड नंबर, ओटीपी या पासवर्ड साझा न करें। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा भेजे गए संदेश को बिना सत्यापन के स्वीकार न करें। सरकारी नोटिस आमतौर पर आधिकारिक ई-मेल आईडी या प्रमाणित माध्यमों से ही भेजे जाते हैं। इसलिए भेजने वाले का नंबर या ई-मेल आईडी अवश्य जांच लें। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इंटरनेट का उपयोग हमेशा सावधानी से करें और केवल आधिकारिक वेबसाइटों का ही इस्तेमाल करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन या वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा नजदीकी साइबर क्राइम थाना या संबंधित थाने में स्थापित साइबर हेल्पडेस्क पर भी शिकायत दी जा सकती है। अंत में एसपी दीपक सहारण ने कहा कि साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है। यदि नागरिक सावधान रहेंगे और दूसरों को भी इस प्रकार की ठगी के बारे में जागरूक करेंगे, तो साइबर अपराधियों की योजनाओं को काफी हद तक विफल किया जा सकता है।
संवाददाता- रमेश भार्गव
