भोपाल। डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को राज्य स्तरीय प्रवेश उत्सव के साथ चार दिवसीय ‘स्कूल चलें हम’ अभियान की शुरुआत की। राजधानी भोपाल के सांदीपनि विद्यालय टीटीनगर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और अब छात्र निजी स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल नए नामांकन में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं यदि केवल सरकारी स्कूलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह वृद्धि 36 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ड्रॉपआउट के अंतर को लगभग शून्य करने में सरकार को बड़ी सफलता मिली है, जो इस वर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि छात्रों की सुविधा के लिए गुरुवार को प्रदेश भर में करीब 4 लाख साइकिलों का वितरण किया जाएगा। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि वे पढ़-लिखकर आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें। उन्होंने कहा कि छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने स्कूटी योजना भी लागू की है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगभग 76 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष प्रदेश में करीब 1 करोड़ 45 लाख बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 1900 से अधिक छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है, जिनकी कुल क्षमता लगभग 95 हजार छात्रों की है। इसके अलावा कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ सकें। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए बड़ी संख्या में लैपटॉप वितरित किए गए हैं। वर्ष 2024–25 में 89 हजार से अधिक और वर्ष 2025–26 में 94 हजार से अधिक लैपटॉप छात्रों को दिए जा चुके हैं। इसके साथ ही इस वर्ष के बजट में विद्यार्थियों के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बच्चों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया और प्रतीकात्मक रूप से साइकिलों का वितरण भी किया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री विजय शाह और मंत्री कृष्णा गौर सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रदेश में करीब 92 हजार सरकारी स्कूल और लगभग 85 लाख विद्यार्थी इस शिक्षा तंत्र का हिस्सा हैं। अभियान के तहत नामांकन बढ़ाने, स्कूल से बाहर बच्चों को वापस लाने और शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने के लिए राज्य से लेकर गांव स्तर तक विस्तृत कार्यक्रम तय किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। पहले दिन बालसभा के माध्यम से बच्चों को स्कूल से जोड़ा जा रहा है और उन्हें नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों का वितरण किया जा रहा है, ताकि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में पढ़ाई में कोई बाधा न आए। साथ ही बच्चों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे स्कूल का वातावरण उत्साहपूर्ण बन सके। अभियान के दूसरे दिन ‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के सफल लोग—जैसे खिलाड़ी, कलाकार, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता—स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में प्रेरित करेंगे। तीसरे दिन स्कूलों में सांस्कृतिक और खेल-कूद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पालकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी और जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से अधिक रही है, उनके अभिभावकों को सम्मानित किया जाएगा। अभियान के अंतिम दिन उन विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो पढ़ाई में पिछड़ गए हैं या कक्षोन्नति प्राप्त नहीं कर सके। शिक्षकों द्वारा उनके पालकों से संवाद कर बच्चों को फिर से पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया जाएगा। साथ ही शाला प्रबंधन समिति की बैठक में नए सत्र की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉपआउट कम करने पर विशेष फोकस रहेगा। इसके अलावा गांवों और बस्तियों में सर्वे कर ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है, जो अभी तक स्कूल से बाहर हैं। शिक्षकों और प्रशासनिक अमले को निर्देश दिए गए हैं कि हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाए। इस तरह ‘स्कूल चलें हम’ अभियान के जरिए सरकार प्रदेश में शिक्षा के स्तर को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।
