जयपुर। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पास नहीं हो पाने के बाद राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी “ओछी राजनीति” के कारण महिलाओं के सपनों पर पानी फिर गया है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री के बयान को “स्क्रिप्टेड” बताते हुए पलटवार किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्षी दल परिवारवाद की राजनीति करते हैं और उन्हें यह डर था कि महिलाएं आगे बढ़कर उनकी राजनीति को चुनौती देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक गिरने के बाद विपक्ष ने जिस तरह का रवैया अपनाया, वह “शर्मनाक” था। सीएम ने कहा कि विपक्ष ने हमेशा महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है और जब वास्तविक सशक्तिकरण का मौका आया, तब उन्होंने बाधाएं खड़ी कीं। सीएम शर्मा ने आगे कहा कि “विपक्ष कान खोलकर सुन ले, महिलाएं इस अपमान को भूलने वाली नहीं हैं। आने वाले समय में माता-बहनें इसका जवाब देंगी।” उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए।

दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे “दिल्ली से आई पर्ची” पढ़कर बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी वास्तव में महिलाओं का सम्मान करती, तो दीया कुमारी को मुख्यमंत्री बनाया जाता। डोटासरा ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं को शीर्ष पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है। डोटासरा ने प्रेस वार्ता के दौरान दीया कुमारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री को केवल बैठाकर रखा गया और उन्हें बोलने का अवसर तक नहीं दिया गया। उनके अनुसार, सरकार में दीया कुमारी को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है और महत्वपूर्ण निर्णयों, विशेषकर बजट जैसे मामलों में, उनकी राय नहीं ली जाती। यहां तक कि उनके विभाग से संबंधित बैठकों में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाता। महिला आरक्षण बिल को लेकर छिड़ी यह राजनीतिक जंग आने वाले समय में और तेज हो सकती है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़कर विपक्ष को घेरने में जुटा है, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों और आंतरिक कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। इस मुद्दे का असर आगामी चुनावी राजनीति पर भी पड़ने की संभावना है, क्योंकि महिला मतदाताओं की भूमिका लगातार निर्णायक होती जा रही है।
