भरतपुर। गोविन्द सिंह डोटासरा ने भरतपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भरतपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस गठबंधन का केवल एक विधायक था, जो अब पार्टी छोड़कर चला गया। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सुभाष गर्ग ने कांग्रेस के समर्थन से वोट हासिल किए, लेकिन बाद में “बीजेपी वाली सवारी” हो गए। उन्होंने कहा कि यह केवल नेता की मजबूरी हो सकती है, लेकिन जनता की कोई मजबूरी नहीं होती। कार्यक्रम बयाना विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक दिवंगत बृजेंद्र सिंह सूपा की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे। डोटासरा ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ अन्याय किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुने हुए जिला प्रमुख को विधायक बना दिया गया, लेकिन उसके बाद जिला प्रमुख का पद खाली छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार छह महीने के भीतर उपचुनाव कराकर नया जिला प्रमुख चुना जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी सोच लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, जहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधि की जगह प्रशासनिक अधिकारी काम कर रहे हैं। डोटासरा ने कहा कि जिला कलेक्टर और अन्य अधिकारी उस पद पर बैठकर काम करने को मजबूर हैं, जहां जनता का प्रतिनिधि होना चाहिए। ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को लेकर भी उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। डोटासरा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय परियोजना बनाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे अमल में नहीं लाया गया। यदि यह परियोजना राष्ट्रीय घोषित होती, तो 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाती और 10 प्रतिशत राज्य सरकार देती। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पूरी लागत राज्य सरकार को वहन करनी पड़ेगी, जबकि सरकार पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रही है। डोटासरा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों का वेतन तक समय पर देने में असमर्थ है, ऐसे में ERCP जैसी बड़ी परियोजना के लिए धन जुटाना मुश्किल होगा। डोटासरा के इस बयान से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
