रावतसर। रावतसर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आज सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता को समर्पित विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। यह सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक संदेश भी लेकर आया। सुबह से ही रामलीला मैदान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहाँ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय, अनुशासित और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। इस विराट हिन्दू सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में त्रिवेणी संगम डेरा जोरावरपुरा से पधारे संत प्रवर राघवानंद जी महाराज ने अपने ओजस्वी और मार्गदर्शक विचारों से जनमानस को संबोधित किया। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में रावतसर डेरा प्रेम नाथ जी महाराज के संचालक संत बालकनाथ जी महाराज, संत प्रभुरामदास जी महाराज, विभाग संघ संचालक श्रीगंगानगर से चिमन लाल, ब्रह्मकुमारी आश्रम से बहन नीलिमा, प्रेमलता गुप्ता एवं विष्णु जोशी मंचासीन रहे। सभी संतों और अतिथियों का पारंपरिक स्वागत-सत्कार कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत पावन वातावरण में 1100 श्री हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से की गई। इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों से आए नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अनुशासनबद्ध होकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। बच्चों द्वारा किए गए इस सामूहिक पाठ ने यह संदेश दिया कि यदि आने वाली पीढ़ी को संस्कार, भक्ति और भारतीय संस्कृति से जोड़ा जाए तो समाज का भविष्य स्वतः ही सुदृढ़ हो जाएगा। यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा। सम्मेलन में उपस्थित वक्ताओं और संत-महात्माओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दू होना केवल एक पहचान या नाम नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है, जिसमें सत्य, अहिंसा, सेवा, संयम, त्याग और संस्कार निहित हैं।

वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल स्वयं को हिन्दू कहना पर्याप्त नहीं, बल्कि हिन्दू धर्म के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए संगठित रहना और धर्म के मार्ग पर चलना आवश्यक है। उन्होंने समाज को जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया। संतों ने अपने शिक्षाप्रद प्रवचनों में कहा कि आज के समय में जब भौतिकता बढ़ रही है, तब आध्यात्मिक शिक्षा और नैतिक मूल्यों की सबसे अधिक आवश्यकता है। बच्चों और युवाओं को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास के बारे में जानना चाहिए, ताकि वे सही और गलत में भेद कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान जी का जीवन सेवा, समर्पण और निस्वार्थ कर्म का प्रतीक है, और हनुमान चालीसा का पाठ व्यक्ति के जीवन में साहस, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

कार्यक्रम के दौरान समाज में सद्भाव, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दू समाज को संगठित रहकर न केवल अपने धर्म की रक्षा करनी चाहिए, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की सेवा करना भी अपना कर्तव्य समझना चाहिए। यही सच्चा धर्म और सच्ची भक्ति है। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन ओम प्रकाश सुथार द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को मर्यादित, सुव्यवस्थित और समयबद्ध रूप से संचालित किया। सम्मेलन में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों की भी सक्रिय सहभागिता देखने को मिली।

इस मौके पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल, पूर्व विधायक धर्मेन्द्र मोची, पूर्व सांसद भरतराम मेघवाल, प्रताप सिंह सूडा, संघ जिला प्रचारक राधेश्याम, घनश्याम कडवासरा, राहुल सारस्वत, भाजपा नगर अध्यक्ष राकेश शास्त्री सहित बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

पूरे आयोजन में अनुशासन, सुरक्षा और व्यवस्थाएं सराहनीय रहीं। कुल मिलाकर रावतसर में आयोजित यह विराट हिन्दू सम्मेलन धार्मिक जागरण, नैतिक शिक्षा, सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का मजबूत संदेश देकर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित किया।
