हनुमानगढ़। अटल भू-जल योजना के तहत खेतों में डिग्गियों का निर्माण करवाने वाले जिले के करीब 500 किसानों को दस महीने बाद भी अनुदान राशि नहीं मिलने से आक्रोश फूट पड़ा। नाराज किसानों ने शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय का घेराव कर कार्यालय में ही धरना दे दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक अधिकारी उनसे वार्ता कर ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक वे कार्यालय में ही डटे रहेंगे। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह मानुका ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में कृषि विभाग की ओर से जिले में करीब 1280 डिग्गियों का भौतिक सत्यापन किया गया था, जिनमें से 829 डिग्गियों का निर्माण हुआ। उस समय विभागीय अधिकारियों ने किसानों से कहा था कि यदि वे फरवरी-मार्च में डिग्गी का निर्माण पूरा कर लेते हैं तो उन्हें मार्च में ही करीब तीन-तीन लाख रुपए की अनुदान राशि दे दी जाएगी, अन्यथा भुगतान में देरी हो सकती है।

किसानों ने भरोसा कर जल्दबाजी में अपनी पकी हुई फसल तक उखाड़कर डिग्गियों का निर्माण करवा लिया। मानुका के अनुसार प्रति किसान को करीब दो-दो लाख रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसानों के बैंक खातों में एक रुपए की भी अनुदान राशि नहीं आई है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 23 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाने की कोशिश की गई थी। इसके बाद 6 फरवरी को कोहला टोल प्लाजा पर दस मिनट का सांकेतिक चक्काजाम भी किया गया, लेकिन प्रशासन ने किसानों की मांग सुनने के बजाय उन पर एफआईआर दर्ज कर दी।

इसके बावजूद आज तक कोई वार्ता नहीं हुई। किसान नेता ने आरोप लगाया कि फरवरी-मार्च 2024 की फाइलें ही समय पर सबमिट नहीं की गईं, जिससे किसानों की अनुदान राशि अटक गई। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों के बाहर बड़े-बड़े फ्लैक्स लगाकर डिग्गियों के निर्माण के दावे किए जा रहे हैं, जबकि किसानों को पिछले वित्तीय वर्ष की अनुदान राशि तक नहीं मिली है। किसानों का कहना है कि स्थिति यह हो गई है कि कई किसान जमीन बेचने और कर्ज के बोझ से जूझने को मजबूर हो रहे हैं। आक्रोशित किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब और भुगतान का आश्वासन नहीं मिलता, तब तक घेराव जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अब कार्यालय की हर कुर्सी पर किसान बैठेगा, क्योंकि किसानों के अनुसार अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई नहीं है।
