हनुमानगढ़। शारीरिक सीमाएं यदि मजबूत इरादों से टकराएं तो हार मान लेती हैं। इस सत्य को चरितार्थ कर रहे हैं झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड के आदिवासी टोला हटवे निवासी 28 वर्षीय सजुल दुड़ू, जो एक हाथ और एक पैर के सहारे साइकिल से पूरे देश की यात्रा कर रहे हैं। ट्रांसमिशन लाइन की चपेट में आने से अपना बायां हाथ और एक पैर गंवाने के बावजूद सजुल ने जीवन से हार नहीं मानी। पिछले 11 महीनों से वे ‘ऑल इंडिया वन हैंड, वन लेग साइकिल राइड’ पर हैं और अब तक 13,800 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। इस दौरान वे 16 राज्यों की सीमाएं पार कर चुके हैं। उनका उद्देश्य न केवल विश्व रिकॉर्ड बनाना है, बल्कि यह संदेश देना भी है कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति से जीती जाने वाली चुनौती है।

राजस्थान में प्रवेश के बाद मंगलवार को सजुल हनुमानगढ़ पहुंचे, जहां ‘पावर ऑफ पेडल्स’ सहित स्थानीय सामाजिक संगठनों, युवाओं और नागरिकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें फूलमालाएं पहनाकर सम्मानित किया गया और उनके जज्बे को सलाम किया गया। इस अवसर पर एडवोकेट दीपक सोनी, आनंद सोनी, गुरदौर सिंह, सेवी सिंह, पंकज सिंह, विवेक आर्य, प्रिंस पाल, पवन कुमार और बजरंग सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। सजुल ने कहा कि हनुमानगढ़ में मिला स्नेह और सम्मान उनकी यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उनकी साइकिल पर लगे बोर्ड पर ‘ऑल इंडिया वन हैंड, वन लेग साइकिल राइड’ और ‘स्टार्ट फ्रॉम हजारीबाग, झारखंड’ अंकित है, जो उनकी साहसिक यात्रा की कहानी स्वयं बयां करता है।
परिवार बना संघर्ष की ताकत
जहां सजुल देशभर में संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल बन रहे हैं, वहीं उनके घर पर उनकी पत्नी सरिता देवी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। वे अपने छह वर्षीय पुत्र सत्य दुड़ू और तीन वर्षीय पुत्री शकुंतला कुमारी की देखभाल कर रही हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने सजुल के सपनों को टूटने नहीं दिया। बिना किसी बड़े आर्थिक सहयोग के शुरू हुई इस यात्रा में देशभर के लोग उन्हें भोजन, ठहरने और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।

सजुल अपने प्रत्येक पड़ाव की झलक सोशल मीडिया के माध्यम से साझा कर युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। हनुमानगढ़ में उपस्थित नागरिकों ने कहा कि सजुल दुड़ू का साहस हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति समर्पण और अटूट आत्मविश्वास ही सफलता की वास्तविक कुंजी है।
