रावतसर। यूजीसी अमेंडमेंट बिल के विरोध में सवर्ण समाज की ओर से पूर्व घोषित भारत बंद के तहत रावतसर पूरी तरह से बंद रहा। इस भारत बंद का असर सुबह से ही कस्बे के हर क्षेत्र में साफ दिखाई दिया। मुख्य बाजार, छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान, निजी संस्थान और कई सेवाएं स्वेच्छा से बंद रहीं। अनुमान के अनुसार रावतसर में करीब 70 से 80 प्रतिशत तक बाजार बंद रहे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस आंदोलन को समाज का व्यापक समर्थन मिला है। यूजीसी अमेंडमेंट बिल के विरोध में सवर्ण समाज के नेतृत्व में आज रावतसर में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। यह रैली मटोरिया गैरेज से शुरू हुई, जहां सुबह से ही बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग एकत्रित होने लगे थे। रैली में युवा, बुजुर्ग, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी वर्ग और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लेकर प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी अमेंडमेंट बिल वापस लेने की मांग को बुलंद किया। रैली मटोरिया गैरेज से रवाना होकर रावतसर के प्रमुख मार्गों से होती हुई चांदोरा मार्केट, मुख्य बाजार, व्यावसायिक क्षेत्र और अन्य प्रमुख चौराहों से गुजरी। रैली के दौरान प्रदर्शनकारी लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। “यूजीसी अमेंडमेंट बिल वापस लो”, “शिक्षा से खिलवाड़ नहीं चलेगा”, “सवर्ण समाज एकता जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा कस्बा गूंज उठा। रैली के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा, हालांकि प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने स्वयं ही ट्रैफिक को सुचारू बनाए रखने में सहयोग किया, जिससे आमजन को अधिक परेशानी न हो। यह आंदोलन पूरी तरह से अनुशासित और शांतिपूर्ण रहा, जो सवर्ण समाज की जागरूकता और संगठन शक्ति को दर्शाता है। रैली के बाद प्रदर्शनकारी महाराणा प्रताप चौक पहुंचे, जहां एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने यूजीसी अमेंडमेंट बिल को शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। वक्ताओं का कहना था कि यह अमेंडमेंट बिल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करता है और इससे शिक्षा का स्तर प्रभावित होगा। सभा को संबोधित करते हुए सवर्ण समाज के वरिष्ठ नेताओं और समाजसेवियों ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश की रीढ़ होती है और यदि शिक्षा व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ की गई, तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी अमेंडमेंट बिल को बिना पर्याप्त चर्चा और समाज के सभी वर्गों की सहमति के लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सभा में विष्णु जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि यूजीसी अमेंडमेंट बिल केवल शिक्षकों और छात्रों का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस बिल के माध्यम से शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचेगी।

वहीं छगन जोशी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस बिल को तुरंत वापस ले और शिक्षा जगत से जुड़े सभी पक्षों से संवाद स्थापित करे। प्रेम सिंह सुडा ने अपने वक्तव्य में कहा कि सवर्ण समाज हमेशा से राष्ट्रहित और शिक्षा के पक्ष में खड़ा रहा है और आगे भी किसी भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष करता रहेगा। सभा को संबोधित करते हुए सुरेन्द्र बिहानी ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इस बिल को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। भवानी शंकर शर्मा ने कहा कि आज का रावतसर बंद यह साबित करता है कि समाज अब जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगा। सुशील खदरिया और राकेश शास्त्री ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि यूजीसी अमेंडमेंट बिल से शिक्षा के मूल उद्देश्य पर असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह जनभावनाओं का सम्मान करे और इस बिल को वापस ले। सभा में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी एक स्वर में आंदोलन को और तेज करने की बात कही। सभा के दौरान सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के लोग मौजूद रहे। लोगों में सरकार के प्रति रोष साफ नजर आया, लेकिन इसके बावजूद पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष लोकतांत्रिक और अहिंसक रहेगा, लेकिन मांग पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। भारत बंद का असर रावतसर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिला। कई गांवों से लोग रैली और सभा में शामिल होने के लिए पहुंचे। व्यापारियों ने भी स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दिया। इससे यह साफ संकेत मिला कि यूजीसी अमेंडमेंट बिल को लेकर असंतोष केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न तबकों में फैल चुका है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल पूरे समय मौके पर तैनात रहा और स्थिति पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों ने बताया कि बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। कुल मिलाकर, यूजीसी अमेंडमेंट बिल के विरोध में आज रावतसर में सवर्ण समाज द्वारा आयोजित भारत बंद व्यापक असर के साथ सफल रहा। बाजार बंद रहे, रैली और सभा के माध्यम से केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया गया और यह संदेश दिया गया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाज किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस विरोध और जनआक्रोश को कितनी गंभीरता से लेती है और यूजीसी अमेंडमेंट बिल पर आगे क्या फैसला करती है।
