सूरतगढ़/अजमेर। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सूरतगढ़ के लिए गर्व का क्षण है। सूरतगढ़ निवासी शोधार्थी सविता सोमानी को अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। यह उपाधि उन्हें महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के अंग्रेजी विभाग द्वारा प्रदान की गई। सविता ने अपना शोध कार्य अपनी मार्गदर्शक डॉ. रश्मि भटनागर के कुशल निर्देशन और मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूर्ण किया। सविता सोमानी का शोध विषय “काल्पनिक वर्णन और इतिहास: अमिताव घोष और सलमान रुश्दी के चयनित उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन” रहा, जो समकालीन अंग्रेजी साहित्य में कथा-वाचन (फिक्शनल नरेशन) और इतिहास के अंतर्संबंधों का गहन एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अपने शोध में उन्होंने सुप्रसिद्ध साहित्यकार अमिताव घोष और सलमान रुश्दी के चयनित उपन्यासों का आलोचनात्मक अध्ययन करते हुए यह प्रतिपादित किया कि किस प्रकार ऐतिहासिक घटनाएं और कल्पनात्मक संरचना एक-दूसरे के साथ संवाद करती हैं और साहित्य को व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ प्रदान करती हैं। यह शोध न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी संदर्भ सिद्ध होगा। वर्तमान में सविता सोमानी केवीएस (केंद्रीय विद्यालय संगठन) में अंग्रेजी शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। उनकी अकादमिक यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक रही है। उन्होंने चार विषयों में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है, जो उनकी बहुआयामी शैक्षणिक रुचि और अध्ययनशीलता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित UGC नेट तथा राज्य स्तरीय SET जैसी उच्च स्तरीय पात्रता परीक्षाएं भी सफलता पूर्वक उत्तीर्ण की हैं। अध्यापन के साथ-साथ वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को सकारात्मक साहित्यिक दृष्टिकोण (साहित्यिक योग्यता) विकसित करने, पाठ्यक्रम की गहराइयों को समझने और परीक्षा की सूक्ष्मताओं से परिचित कराने में निरंतर सहयोग प्रदान कर रही हैं। अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर सविता सोमानी ने गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसका श्रेय अपने माता-पिता—श्री रमेश कुमार सोमानी एवं श्रीमती इन्दु सोमानी—को दिया, जिनके संस्कार, प्रोत्साहन और समर्थन ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपनी शोध मार्गदर्शक डॉ. रश्मि भटनागर के प्रति भी आभार प्रकट किया, जिनके मार्गदर्शन और अकादमिक दृष्टि ने उनके शोध को दिशा प्रदान की। साथ ही, उन्होंने अपने भाई-बहनों और मित्रों से मिले निरंतर संबल और सहयोग की भी सराहना की। सविता ने बताया कि बचपन से ही ‘डॉक्टर’ शब्द के प्रति उनके मन में विशेष सम्मान रहा है और कठोर परिश्रम, अनुशासन तथा सीखने की निरंतर ललक ने आज उन्हें इस लक्ष्य तक पहुंचाया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और शिक्षण संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
