जयपुर। राजस्थान की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल की ओर से कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट पर की गई टिप्पणी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने इस टिप्पणी को अशोभनीय बताते हुए बीजेपी पर राजनीतिक मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह टिप्पणी न केवल निंदनीय है, बल्कि भाजपा की गिरती सियासी संस्कृति को दर्शाती है। उन्होंने लिखा कि राजनीति में वैचारिक विरोध होना चाहिए, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अपमान लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। डोटासरा ने बीजेपी नेतृत्व से अपने नेताओं के आचरण पर नियंत्रण रखने और राधामोहन दास अग्रवाल से माफी की मांग की। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी अब मुद्दों से भटककर व्यक्तिगत आरोपों और निम्नस्तरीय भाषा का सहारा ले रही है। जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने घोषित संस्कारों को भूल चुकी है और अब संवाद के बजाय अपमान की राजनीति कर रही है। उन्होंने भी बीजेपी नेतृत्व से इस मामले में तत्काल कार्रवाई और माफी की मांग की। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राधामोहन दास अग्रवाल को बयान देने से पहले राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को समझना चाहिए। चौधरी ने कहा कि यहां सम्मान और सौहार्द की परंपरा है, ऐसे में इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है। उन्होंने भी टिप्पणी को भाजपा की गिरती राजनीतिक संस्कृति का उदाहरण बताया। कोटा से कांग्रेस के पूर्व लोकसभा उम्मीदवार प्रहलाद गुंजल ने भी बीजेपी प्रभारी पर हमला बोला। उन्होंने विवादित टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए यहां तक कह दिया कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को राधामोहन दास अग्रवाल के स्वास्थ्य की जांच करवानी चाहिए। गुंजल ने तंज कसते हुए कहा कि गर्मी के कारण उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया लगता है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं, तो पायलट पर इस तरह की टिप्पणी क्यों। इस पूरे विवाद के बीच टोंक में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने राधामोहन दास अग्रवाल का पुतला फूंका, नारेबाजी की और प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। कुल मिलाकर, इस बयान के बाद राजस्थान की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बता रही है, वहीं अब निगाहें बीजेपी की ओर हैं कि वह इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।
