हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में 43 डिग्री तापमान के बावजूद किसानों का ‘घेरा डालो-डेरा डालो किसान क्रांति आंदोलन’ मंगलवार से शुरू हो गया है। गेहूं और मूंग की खरीदी में आ रही समस्याओं को लेकर हरदा, देवास, नर्मदापुरम और खंडवा जिलों के किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ कृषि उपज मंडी में जुट रहे हैं। आंदोलन में किसानों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जिससे प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्थिति को देखते हुए कलेक्ट्रेट और मंडी क्षेत्र को सुरक्षा छावनी में तब्दील कर दिया गया है। करीब 5 बटालियनों के 1100 जवान तैनात किए गए हैं, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है, वहीं अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच बातचीत का दौर भी जारी है। किसान नेता सुनील गोल्या ने बताया कि आंदोलन लंबा चल सकता है, इसे ध्यान में रखते हुए किसान पूरी तैयारी के साथ आए हैं। ट्रॉलियों में आटा, दाल और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री लाई गई है। किसान मंडी परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दाल-बाटी बनाकर भोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं किसान नेता नानकराम बेनीवाल और राजेंद्र पटेल ने कहा कि किसानों ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को अस्थायी घरों में बदल लिया है। वे बिस्तर और अन्य आवश्यक सामान भी साथ लेकर आए हैं। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेता, तो आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रह सकता है। आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। हरदा से कांग्रेस विधायक डॉ. आर.के. दोगने अपने समर्थकों के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचे और किसानों को समर्थन दिया। इससे आंदोलन को और मजबूती मिलती नजर आ रही है। प्रशासन की ओर से एसडीएम अशोक डेहरिया और तहसीलदार राजेंद्र पंवार मंडी पहुंचे और किसानों से चर्चा की। हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि वे अपनी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर को ही ज्ञापन सौंपेंगे। एसडीएम डेहरिया ने बताया कि कलेक्टर किसानों से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन फिलहाल किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। एसडीओपी शालिनी परस्ते के अनुसार, आंदोलन फिलहाल शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ किसान वापस लौटने लगे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में किसान अभी भी डटे हुए हैं। प्रशासन और किसानों के बीच संवाद जारी है, जिससे समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल हरदा की कृषि उपज मंडी किसानों के आंदोलन का केंद्र बनी हुई है, जहां करीब 1000 से अधिक ट्रैक्टरों की मौजूदगी इस आंदोलन की व्यापकता को दर्शा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन और किसानों के बीच चल रही बातचीत किस निष्कर्ष पर पहुंचती है।
