हनुमानगढ़। क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय ने पहल करते हुए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. आलोक त्रिपाठी और डॉ. रामावतार मीणा ने इस समझौते को औपचारिक रूप दिया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के डायरेक्टर जनरल गिरीश कुमार भी मौजूद रहे। इस पांच वर्षीय समझौते के तहत दोनों संस्थान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे। विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक लैब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जिससे छात्र-छात्राओं को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण भी मिल सकेगा। साथ ही साइबर फॉरेंसिक और साइबर क्राइम जैसे विषयों पर विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन वरुण यादव और मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जुनेजा ने इस पहल को क्षेत्र के युवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब छात्र-छात्राओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विभूति नारायण सिंह ने बताया कि इस समझौते के तहत छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं और औद्योगिक इंटर्नशिप के अवसर भी मिलेंगे।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
कुलपति डॉ. रामावतार मीणा और आईक्यूएसी डायरेक्टर डॉ. अवधेश शर्मा ने बताया कि जल्द ही नए बैच, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम और स्किल-बेस्ड कोर्स शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों के सहयोग से छात्र-छात्राओं को कौशलयुक्त बनाना ही विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
