रावतसर। होली के पावन पर्व को लेकर शहर में उत्साह अपने चरम पर पहुंच गया है। गली-गली, मोहल्लों और चौपालों में रंग, उमंग और लोक परंपराओं की खुशबू बिखरने लगी है। इसी उल्लासपूर्ण माहौल के बीच संजय कॉलोनी में आयोजित पारंपरिक फाग उत्सव ने पूरे क्षेत्र को रंगमय और सुरमय बना दिया। देर शाम से लेकर रात के अंतिम प्रहर तक लोक गीतों, ढोल-नगाड़ों और फाग रसिया की गूंज ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शाम ढलते ही छाया फाग का रंग
जैसे ही सूर्यास्त होता है, संजय कॉलोनी का वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। ढोल-नगाड़ों की थाप और राजस्थानी लोक धुनों की गूंज से कॉलोनी जीवंत हो उठती है। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा—सभी एक साथ फाग गीतों की लय पर झूमते नजर आते हैं। “फागण रंग में रंगो, होली खेलो सजनी” जैसी पारंपरिक पंक्तियां माहौल में नई ऊर्जा भर देती हैं। रंगों और सुरों का यह संगम मानो पूरे मोहल्ले को लोक संस्कृति की सरिता में डुबो देता है।

लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
फाग उत्सव में स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। वीरेंद्र कस्वां, एडवोकेट रामनिवास शर्मा, राजू मिश्रा, मनोज सहारण, राजू डिडवानिया, पतराम, नरेश कुमार और कृष्ण डूडी सहित अनेक कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज और जोशीले अंदाज से श्रोताओं का मन मोह लिया। उनकी सुरमयी गायकी और पारंपरिक फाग रसिया ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर रात तक कार्यक्रम से जुड़े रहे। हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट और “होली है” के उद्घोष से वातावरण और भी उल्लासपूर्ण हो उठा।
सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश
उत्सव के दौरान वार्डवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक है। फाग उत्सव जैसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाते हैं। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं और परंपरागत ढंग से मिलकर उत्सव का आनंद लिया।

वर्षों पुरानी परंपरा, आज भी बरकरार उत्साह
आयोजक वीरेंद्र कस्वां ने बताया कि संजय कॉलोनी में फाग उत्सव की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। हर साल होली से पूर्व कॉलोनीवासी मिलकर इस आयोजन को सफल बनाते हैं। शाम से लेकर देर रात तक लोक गीत, ढोल-नगाड़े और नृत्य का सिलसिला लगातार चलता रहता है। इस आयोजन में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता, सभी वर्गों और आयु के लोग समान रूप से भाग लेते हैं, जो इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
लोक संस्कृति की जीवंत झलक
रावतसर में होली से पहले आयोजित यह फाग उत्सव इस बात का प्रमाण है कि लोक परंपराएं आज भी पूरी जीवंतता के साथ निभाई जा रही हैं। आधुनिकता के इस दौर में भी जब लोग सामूहिक रूप से लोक गीतों और परंपराओं से जुड़ते हैं, तो त्योहारों का आनंद कई गुना बढ़ जाता है। फाग उत्सव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब लोक संस्कृति और सामूहिक उत्साह साथ आते हैं, तो रंगों का यह पर्व सचमुच खुशियों का महाकुंभ बन जाता है।
