ऐलनाबाद। कुमारी सैलजा ने हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा स्नातकोत्तर शिक्षक (संगणक विज्ञान) भर्ती प्रक्रिया को लेकर हरियाणा सरकार से जवाब माँगा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में निकली 1711 पदों की भर्ती, पुनः विज्ञापन के बाद भी, वर्ष 2026 में परिणाम तक पहुँचना युवाओं के साथ गंभीर अन्याय है।
उन्होंने कहा कि आठ वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद केवल 39 अभ्यर्थियों का चयन किया जाना और पाँच हजार से अधिक अभ्यर्थियों को अस्वीकार कर देना भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर प्रश्न खड़े करता है। इतने लंबे समय तक अभ्यर्थियों को आशा में रखकर अंततः “अयोग्य” घोषित कर देना उनके आत्मसम्मान और भविष्य पर आघात है। कुमारी सैलजा ने कहा कि बदलते नियमों, अलग-अलग मानदंडों और परीक्षा पद्धति में निरंतर परिवर्तन ने अभ्यर्थियों को असमंजस में रखा। अब अनेक अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर चुके हैं- उनकी क्षति की भरपाई कौन करेगा? उन्होंने यह भी कहा कि हाल की अन्य भर्तियों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने और अत्यंत कम चयन होने के उदाहरण सामने आए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि समस्या अभ्यर्थियों की योग्यता में नहीं, बल्कि प्रक्रिया की खामियों में हो सकती है।
कुमारी सैलजा ने मांग की कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जाँच करवाई जाए, चयन मानदंड सार्वजनिक किए जाएँ और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।
किसानों पर बढ़ता आर्थिक बोझ : कुमारी सैलजा
कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियाँ लगातार किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही हैं। पहले 50 किलोग्राम का यूरिया बोरा 45 किलोग्राम किया गया और अब 40 किलोग्राम तक सीमित कर दिया गया, जबकि कीमत वही वसूली जा रही है। यह किसानों के साथ सीधा आर्थिक अन्याय है। उन्होंने कहा कि न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी है और न ही खाद में पर्याप्त पोषक तत्वों की सुनिश्चित उपलब्धता। ऐसी नीतियाँ अन्नदाता की लागत बढ़ाती हैं और आय घटाती हैं।
