बीकानेर। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चयन के अधिक अवसर देने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संयुक्त शासन सचिव की ओर से जारी परिपत्र के अनुसार अब राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 11 के विद्यार्थियों के लिए विषय चयन की नई व्यवस्था लागू की गई है। फिलहाल यह व्यवस्था केवल सरकारी स्कूलों में प्रभावी होगी। नई व्यवस्था के तहत कक्षा 11 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी विद्यालय में स्वीकृत संकायों के अंतर्गत चार ऐच्छिक (वैकल्पिक) विषयों के साथ एक अनिवार्य विषय के रूप में अंग्रेजी का चयन कर सकेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को उनकी रुचि और भविष्य की जरूरतों के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करना है। परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि विज्ञान संकाय वाले विद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान विषय स्वीकृत नहीं है, तो भी छात्र इसे चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में चुन सकते हैं, बशर्ते विद्यालय में कंप्यूटर अनुदेशक उपलब्ध हो। इसी तरह, एकल संकाय वाले विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा विषय स्वीकृत न होने पर भी, शिक्षक उपलब्ध होने की स्थिति में इसे ऐच्छिक विषय के रूप में लिया जा सकेगा। निर्देशों के अनुसार विज्ञान संकाय वाले विद्यालयों में चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में अधिकतम दो विषय संचालित किए जा सकेंगे, जिनका चयन संस्था प्रधान करेंगे। वहीं कला और वाणिज्य संकाय वाले विद्यालयों में चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में केवल एक विषय ही संचालित किया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो विद्यार्थी पूर्व की व्यवस्था के तहत तीन ऐच्छिक और दो अनिवार्य विषय लेना चाहते हैं, उनके लिए पुरानी प्रणाली यथावत जारी रहेगी। इसके साथ ही विद्यालयों के संस्था प्रधानों को कक्षा 10 के परीक्षा परिणाम से पहले ही संभावित विद्यार्थियों से उनकी विषय रुचि के विकल्प लेने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विषयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। परिपत्र की प्रतिलिपि संबंधित विभागों, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर और राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल को भी भेजी गई है, जिससे पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और नई व्यवस्था का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल विषय चयन में लचीलापन बढ़ेगा, बल्कि छात्रों के समग्र शैक्षणिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
