विश्व प्रसिद्ध बाबा श्याम का फाल्गुनी लक्खी मेला 21 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी तक चलेगा। इस पावन मेले को लेकर प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए सभी व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस बार भक्तों की रिकॉर्ड तोड़ भीड़ आने की संभावना को देखते हुए दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। भक्तों को बाबा श्याम की एक झलक पाने के लिए खाटूधाम कस्बे में बनाए गए 6 प्रमुख ब्लॉकों से होकर गुजरना होगा. इसका अर्थ है कि श्रद्धालुओं को दर्शन के मुख्य द्वार तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का पैदल सफर तय करना होगा। श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूरे क्षेत्र को 6 ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। इन ब्लॉकों से होते हुए भक्त 40 फीट चौड़े मार्ग तक पहुंचेंगे, जिसके बाद उन्हें 75 फीट चौड़े और 14 लाइनों वाले मुख्य मेला ग्राउंड में प्रवेश मिलेगा। यहाँ से भक्त कतारबद्ध होकर धीरे-धीरे बाबा के मुख्य दरबार की ओर बढ़ेंगे। भीड़ के भारी दबाव को देखते हुए चारण मेला मैदान में इस बार एक अतिरिक्त ब्लॉक जोड़कर कुल 7 ब्लॉक बनाए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष यहाँ केवल 6 ब्लॉक ही रखे गए थे।
रींगस से मंदिर तक का सफर
मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए रींगस रोड स्थित श्याम वाटिका के पीछे लगभग 40 बीघा भूमि पर तीन अतिरिक्त बैकअप ब्लॉक भी तैयार किए गए हैं. इनका उपयोग तब किया जाएगा जब लखदातार मैदान और चारण मेला मैदान में श्रद्धालुओं की संख्या क्षमता से अधिक हो जाएगी. मेले के दौरान पदयात्रियों को रींगस से खाटूधाम तक करीब 38 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होगी. सुरक्षा के लिहाज से इस पूरे मार्ग को ‘नो व्हीकल्स जोन’ घोषित किया जाएगा, ताकि भक्तों को मार्ग में किसी वाहन के कारण परेशानी न हो। खाटू श्याम बाबा के दरबार में 21 फरवरी से लक्खी मेले का आयोजन होने वाला है। खाटू श्याम बाबा का दरबार राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है जो दुनिया भर में प्रसिद्ध है। खाटू श्यामजी के दरबार में हर साल लाखों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी मुरादें पूरी करके जाते हैं। यहां पर हर साल होली से पहले फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा तिथि से द्वादशी तिथि तिथि तक भव्य मेला लगता है जो लक्खी मेला के नाम से विख्यात है। वैसे हर महीने की एकादशी और द्वादशी तिथि को सीकर के खाटू श्याम बाबा के दरबार में मेला लगता है। लेकिन लक्खी मेला बेहद खास है जिसमें बाबा खाटू श्याम पर गुलाल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। कहते हैं खाटू श्याम बाबा हर हारे हुए की किस्मत पलट देते हैं और उन्हें खुशियां देकर मालामाल कर देते हैं।
खाटू श्याम के दरबार में लक्खी मेला क्यों लगता है
लख्खी मेला फाल्गुन मास में हर साल इसलिए लगता। इसके पीछे वजह यह बतायी जाती है कि फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि को ही भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर अपना सिर काटकर उनके चरणों में डाल दिया था। इसलिए लक्खी मेला फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि तक चलती है। दरअसल जब महाभारत का युद्ध चल रहा था तो भीम के पौत्र घटोत्कच ने अपनी माता के चरणों को छूकर प्रण किया था कि वह युद्ध में उनका साथ देगा जो पक्ष हार रहा होगा। भगवान श्रीकृष्ण घटोत्कच के इस प्रण से विचलित हो गए क्योंकि युद्ध में कौरव ही हारने वाले थे ऐसे में घटोत्कच कौरवों की ओर शामिल हो जाते तो पांडवों का जीत पाना असंभव हो जाता।
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ऐसे में श्रीकृष्ण बर्बरीक के सामने ब्राह्मण का रूप धारण करके पहुंच गए। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक का मजाक उड़ाया कि युद्ध के लिए जा रहे हो और सिर्फ तीन बाण हैं तुम्हारे पास भला इनसे कैसे युद्ध जीत पाओगे। इस पर बर्बरीक ने अपने बाणों के बारे में बताया कि यह देवी दुर्गा के द्वारा दिए गए अमोघ वाण हैं जिनसे वह संपूर्ण सेना का अंत कर सकते हैं। बर्बरीक ने उसी समय अपने एक बाण से पास के पीपल के वृक्ष के पत्तों पर निशाना साधा एक ही बाण से पीपल के सभी पत्तों में छेद हो गया और एक पत्ता जो भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पैरों के नीचे दबा रखा था बाण वहां आकर ठहर गया था। श्रीकृष्ण को यह समझते देर न लगी कि यह योद्धा अकेला युद्ध जीत सकता है। इसलिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से कहा कि इतने महान योद्धा हो और युद्ध पर ब्राह्मण को बिना कुछ दान दिए चले जाओगे। इस पर बर्बरीक ने कहा कि आप मांग लीजिए जो चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने तत्काल बर्बरीक से उनका सिर मांग लिया। इस पर बर्बरीक ने कहा कि यह दान मांगने वाला कोई ब्राह्मण नहीं हो सकता है। आपको सिर दान दे दूंगा लेकिन आप अपना वास्तविक परिचय दीजिए।
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इस पर श्रीकृष्ण अपने वास्तविक रूप में आ गए। बर्बरीक ने अपना सिर काटकर श्रीकृष्ण के चरणों में रख दिया। तभी रणभूमि में हाहाकार मच गया। सभी लोग श्रीकृष्ण और बर्बरीक के पास आकर खड़े हो गए। इसी समय देवलोक से कई देवियां प्रकट हुईं और उन्होंने बर्बरीक के सिर पर अमृत का छिड़काव कर बताया कि यह सब ब्रह्माजी के शाप के कारण हुआ है। जो बर्बरीक को पूर्वजन्म में प्राप्त हुआ है। बर्बरीक का सिर अमृत के प्रभाव से जीवित हो उठा और भगवान श्रीकृष्ण से बर्बरीक ने युद्ध देखने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक की यह इच्छा पूरी कर दी और कहा कि तुम हारे का सहारा हो तुम दुखियों का दुख दूर करने वाले हो और कलियुग में तुम मेरे नाम से जाने जाओके और खाटू श्याम यानी सच्चे श्याम कहलाओगे। महाभारत युद्ध समाप्त होने पर पांडवों ने बर्बरीक के सिर को राजस्थान के सीकर में लाकर दफना दिया। एक गाय इस स्थान पर अक्सर आती और उसके थन से दूध की धारा यहां स्वयं बहने लगती। यहां खुदाई करने पर खाटू श्याम बाबा का सिर प्राप्त हुआ। बाबा ने यहां के राजा को सपने में मंदिर बनाने का आदेश दिया और फिर बाबा खाटू श्याम का मंदिर बनकर तैयार हुआ। खाटू श्याम में बर्बरीक के सिर की और हरियाणा के हिसार जिले में स्थित स्याहड़वा गांव है जहां पर इनके धड़ की पूजा होती है।
