-दिल्ली के चक्कर लगा रहे गहलोत, पार्टी में बढ़ सकती हैं मुश्किलें: राठौड़
जयपुर। राजस्थान में सियासी बयानबाजी के बीच भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयानों पर तीखा पलटवार किया है। राठौड़ ने कहा कि गहलोत को अब “इंतजार शास्त्र” छोड़ देना चाहिए क्योंकि उनका राजनीतिक जलवा खत्म हो चुका है और अब उन्हें नई पीढ़ी को आगे आने का अवसर देना चाहिए। जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत का राजनीतिक कार्यकाल लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन वे अभी भी उम्मीद के सहारे राजनीति में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और अब उन्हें संतोष का मार्ग अपनाते हुए धीरे-धीरे वानप्रस्थ और सन्यास की ओर बढ़ना चाहिए। राठौड़ ने व्यंग्य करते हुए कहा कि गहलोत साहब को अब “संतोष शास्त्र” सीखने की जरूरत है। उनका कहना था कि इंतजार करते-करते वे खुद ही थक जाएंगे, इसलिए बेहतर है कि अब नई पीढ़ी के नेताओं को आगे आने दिया जाए। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि गहलोत जहां भी संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने गए, वहां पार्टी को नुकसान ही हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया तो वहां पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी तरह जब उन्हें गुजरात का प्रभारी बनाया गया तो वहां भी पार्टी की स्थिति बेहतर नहीं हो सकी। राठौड़ ने कहा कि महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी गहलोत को संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वहां भी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। उनके मुताबिक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस को कई जगहों पर नुकसान झेलना पड़ा और संगठन कमजोर हुआ। हालांकि बयान के दौरान राठौड़ ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उनके और गहलोत के संबंध अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि “गहलोत मेरे अच्छे मित्र हैं और मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।” उन्होंने कहा कि इन दिनों अशोक गहलोत का दिल्ली की ओर रुख बढ़ गया है। इसके पीछे उन्होंने कांग्रेस के अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों को कारण बताया। राठौड़ का कहना था कि कांग्रेस में बड़े फैसले दिल्ली से ही होते हैं और इसलिए कई नेता राष्ट्रीय नेतृत्व की नजरों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वहां सक्रिय रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के अंदर गहलोत के विरोधी खेमे के नेता भी दिल्ली के ज्यादा दौरे कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है। ऐसे हालात में गहलोत के लिए पार्टी के अंदर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मदन राठौड़ ने दावा किया कि आने वाले समय में कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण और ज्यादा बदल सकते हैं, जिससे अशोक गहलोत की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ने की संभावना है। राजस्थान की राजनीति में इन बयानों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी और तीखी हो सकती है।
