हनुमानगढ़। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वाधान में दुर्गा मंदिर जंक्शन स्थित कागद पुस्तकालय में नव संवत्सर स्वागत एवं साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भवानी शंकर शर्मा ने की। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर भारतीय नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं तथा भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत साहित्यिक वातावरण में कविताओं के पाठ के साथ हुई। कवि उदयपाल ने गांव से बिछड़ने के दर्द और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती अपनी मार्मिक कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। वहीं रजनी शर्मा ने सनातन परंपरा के अनुरूप बच्चों को सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कवि आदित्य सिंह राठौड़ ने भारतीय नव वर्ष के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पक्षों को सामने रखा। वहीं अनिल महर्षि ने प्रकृति में वसंत ऋतु के आगमन और नव संवत्सर के आपसी संबंधों पर सुंदर व्याख्या करते हुए प्रकृति के बदलते रंगों का उल्लेख किया। कार्यक्रम में अंग्रेजी साहित्यकार मोहनलाल ने अपने भावना प्रधान गीत का सुरीले कंठ से वाचन किया— “हे राम मेरे दर्श दे दो, पाषाण मूर्ति रोए, वन की छाया में पड़ी हूं धूल में लिपटी हुई”, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। वहीं सुरेंद्र शर्मा सत्यम ने अपनी हास्य कविताओं ‘लातों की बात भूतों को भा गई’ और ‘बेगम की बेगी’ सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया और श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। कवि चैन सिंह शेखावत ने ‘औरत’ शीर्षक कविता के माध्यम से महिलाओं के प्रति संवेदनात्मक भावनाएं व्यक्त कीं। सूर्य प्रकाश जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय गौरैया दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और पक्षियों के संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कुलविंदर सिंह ने धर्म की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए भारतीय संस्कृति के आधारभूत मूल्यों पर प्रकाश डाला। लालचंद कोचर ने विक्रम संवत के महत्व को दर्शाती अपनी नवीन कविता “समय है उत्कर्ष का, स्वागत करें नव वर्ष का” प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा ने चैत्र मास के प्रथम दिवस से प्रारंभ होने वाले हिंदू नव वर्ष के उपलक्ष्य में सभी को शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और साहित्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
