-सीतापुर में 12 साल पुरानी मस्जिद जमींदोज, कोर्ट आदेश के बाद प्रशासन की कार्रवाई
सीतापुर। जिले में प्रशासन ने सोमवार तड़के बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मस्जिद को बुलडोजर से ढहा दिया। यह कार्रवाई लहरपुर कोतवाली क्षेत्र के नयागांव बेहटी गांव में की गई, जहां करीब 12 साल पहले बनी ‘सैयद हजरत उमर फारूक’ मस्जिद को प्रशासन ने अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई सुबह करीब 3 बजे शुरू हुई और सुबह 8 बजे तक पूरी मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया। प्रशासन के मुताबिक मस्जिद तालाब और कब्रिस्तान की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी। ग्राम सभा की शिकायत के बाद मामला तहसील न्यायालय में पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद 6 जनवरी 2026 को अदालत ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए उसे हटाने का आदेश जारी किया था। इसके बाद संबंधित पक्ष को 15 दिन का नोटिस देकर मस्जिद परिसर से जरूरी सामान हटाने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों के अनुसार नोटिस की अवधि पूरी होने के बावजूद निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का फैसला लिया। सोमवार तड़के भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर के जरिए पूरी इमारत को गिरा दिया गया। ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मौके पर एडीएम नीतीश कुमार, एएसपी आलोक सिंह, सीओ लहरपुर आलोक कुमार और एसडीएम लहरपुर आकांक्षा गौतम समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा दो प्लाटून पीएसी, 18 थानों के थानाध्यक्ष, 35 सब इंस्पेक्टर और करीब 250 महिला-पुरुष पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, जिससे किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने। मस्जिद करीब 0.2430 हेक्टेयर यानी लगभग डेढ़ बीघा जमीन पर बनाई गई थी। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार इस जमीन की बाजार कीमत लगभग 6 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मस्जिद के निर्माण में करीब 1 करोड़ रुपये की लागत आई थी। मस्जिद परिसर में 120 फीट लंबा और 90 फीट चौड़ा एक बड़ा हॉल था, जहां नमाज अदा की जाती थी। इसके अलावा चार छोटे-छोटे कमरे भी बनाए गए थे। मस्जिद की देखरेख की जिम्मेदारी मुतवल्ली आलम के पास थी। मस्जिद को लेकर गांव में लंबे समय से विवाद चल रहा था। ग्राम सभा ने दावा किया था कि जिस जमीन पर मस्जिद का निर्माण हुआ है, वह तालाब और कब्रिस्तान की श्रेणी में दर्ज सरकारी भूमि है। इसी आधार पर 18 दिसंबर 2025 को ग्राम सभा की ओर से तहसील न्यायालय में वाद दाखिल किया गया था। प्रशासन ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत सरकारी या ग्राम पंचायत की जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने का प्रावधान है। इस धारा के अंतर्गत तहसीलदार या उपजिलाधिकारी संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर सकते हैं और अवैध कब्जा नहीं हटाने की स्थिति में बेदखली की कार्रवाई कर सकते हैं। इसी कानूनी प्रावधान के तहत यह कार्रवाई की गई। मस्जिद के मौलाना अब्दुल रहमान ने इस कार्रवाई पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह एक सियासी मसला है और इस पर कुछ कहना उचित नहीं होगा। एडीएम नीतीश कुमार ने बताया कि मस्जिद मुख्य सड़क के किनारे स्थित थी, इसलिए यातायात बाधित न हो और भीड़ इकट्ठा न हो, इस कारण कार्रवाई तड़के शुरू की गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना है और पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुसार कानून के तहत की गई है। फिलहाल इलाके में स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी है और अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
