हनुमानगढ़। जिले में स्लीपर सहित निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल के कारण निजी बसों के पहिए पूरी तरह थमे रहे, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। निजी बसों के समर्थन में लोक परिवहन बसों के संचालन पर भी असर पड़ा और कई रूटों पर सेवाएं बाधित रहीं। होली पर्व नजदीक होने से यात्रियों की आवाजाही में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना वृद्धि हो जाती है। ऐसे समय में निजी बसों का संचालन बंद रहने से यात्रा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जंक्शन और टाउन बस स्टैंड पर गुरुवार सुबह से ही यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई यात्री निजी बसों के चलने की उम्मीद में घंटों तक इंतजार करते रहे, लेकिन बसें नहीं पहुंचीं। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग, मजदूर वर्ग, छात्र और नौकरीपेशा लोग सबसे अधिक प्रभावित नजर आए। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें जरूरी कार्यांे से दूसरे शहरों में जाना था, लेकिन बसों के अभाव में यात्रा स्थगित करनी पड़ी। कुछ लोग मजबूरी में महंगे किराए पर टैक्सी या निजी वाहन से यात्रा करने को विवश हुए। निजी बसों के बंद रहने से राजस्थान रोडवेज की बसों और ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। कई रूटों पर रोडवेज बसों में सीट मिलना मुश्किल हो गया है। यात्री खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं। ट्रेनों में भी सामान्य से अधिक भीड़ देखी जा रही है। होली के दौरान विशेष रूप से दिल्ली, जयपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर और अन्य राज्यों के लिए यात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि होती है। निजी स्लीपर बसों में आमतौर पर इस अवधि में 100 प्रतिशत बुकिंग रहती है। ऐसे में हड़ताल लंबी चली तो हजारों यात्रियों की योजनाएं प्रभावित होंगी। बस ऑपरेटरों का कहना है कि परिवहन विभाग की ओर से सख्ती और नियमों की अचानक पालना करवाने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। निजी बस ऑपरेटरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना है कि यदि होली तक भी समाधान नहीं निकला तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल परिवहन विभाग और बस ऑपरेटरों के बीच वार्ता के बावजूद कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में आमजन को राहत मिलने के आसार कम दिखाई दे रहे हैं।
ये हैं बस ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें
प्रदेशभर में जारी इस हड़ताल के तहत निजी बस ऑपरेटरों ने परिवहन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि निलंबित की गई आरसी और फिटनेस को तुरंत बहाल किया जाए। फिटनेस पर लगी रोक हटाई जाए। बस बॉडी कोड और अन्य नए नियम 1 अप्रैल से ही लागू किए जाएं। नियमों के विपरीत बनाए गए चालान निरस्त किए जाएं। स्टेज कैरिज बसों की छत पर माल ढुलाई के स्पष्ट प्रावधान लागू हों। बसों पर लगेज कैरियर की अनुमति प्रदान की जाए।
