श्रीगंगानगर। राजस्थान की वामपंथी राजनीति और किसान–मजदूर आंदोलनों के प्रमुख चेहरे, पूर्व विधायक कॉरेड हेतराम बेनीवाल का सोमवार रात निधन हो गया। वे 94 वर्ष के थे। देर रात लगभग 12:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले कुछ दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे थे और श्रीगंगानगर के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार जारी था। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार के अनुसार उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे उनके पैतृक गांव 8 एलएनपी में किया गया। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए निवास स्थान पर रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

16 अक्टूबर 1932 को जन्मे हेतराम बेनीवाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वामपंथी विचारधारा से की। वे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे और वर्ष 1967 में सादुलशहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद भी उन्होंने लंबे समय तक जनसंघर्षों के माध्यम से क्षेत्र की राजनीति में प्रभाव बनाए रखा। किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई को उन्होंने अपनी पहचान बनाया। श्रीगंगानगर और आसपास के क्षेत्रों में भूमि आवंटन, सिंचाई परियोजनाओं और श्रमिक अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में उनकी भूमिका अहम रही। वर्ष 1971-72 में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण के दौरान जमीन आवंटन को लेकर चले आंदोलन में उनका नेतृत्व उल्लेखनीय रहा।

उनके संघर्षों के चलते तत्कालीन सरकारों को कई निर्णयों में बदलाव करना पड़ा। वर्ष 1990-91 में वे पुनः विधायक निर्वाचित हुए। हालांकि विधानसभा भंग होने के कारण उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत कम रहा, फिर भी जनसरोकारों के मुद्दों पर उनकी सक्रियता निरंतर बनी रही। 2004 के बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बना ली, किंतु सामाजिक आंदोलनों और जनहित के मुद्दों पर वे अंतिम समय तक मुखर रहे। राजनीतिक जीवन के साथ-साथ वे सादगी, स्पष्टवादिता और प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे। उनके सहयोगियों का कहना है कि बेनीवाल ने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की और सत्ता से अधिक जनहित को प्राथमिकता दी। वे दो बार ऐसे आंदोलनों का नेतृत्व कर चुके थे, जिनके चलते सरकारों को अपने निर्णय बदलने पड़े।

उनकी पत्नी चंद्रावली देवी का पूर्व में ही निधन हो चुका है। वे अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। प्रदेश के अनेक राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और किसान यूनियनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और इसे जनआंदोलन की अपूरणीय क्षति बताया है। क्षेत्रवासियों के लिए वे केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि संघर्ष और सिद्धांतों के प्रतीक थे। कॉमरेड हेतराम बेनीवाल का जीवन जनसेवा, संघर्ष और प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा। उनके योगदान को क्षेत्र की राजनीति और किसान आंदोलनों के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
