हनुमानगढ़। मजदूर अधिकार दिवस (1 मई) के मौके पर शुक्रवार को सीटू की ओर से जिला कलक्ट्रेट के समक्ष आक्रोश सभा का आयोजन किया गया। सभा में बड़ी संख्या में मजदूरों ने हिस्सा लेकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया और सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया। सभा में चारों लेबर कोड बिल वापस लेने, न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपए मासिक तय करने, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान करने, किसानों को एमएसपी गारंटी देने, बिजली विधेयक 2022 वापस लेने, प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की व्यवस्था बंद करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने सहित विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। इस मौके पर माकपा नेता रामेश्वर वर्मा ने कहा कि मई दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उन मजदूर शहीदों को याद करने का दिन है जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए कुर्बानियां दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही है और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के एकत्रित होने और अभिव्यक्ति के अधिकारों पर भी असर पड़ा है, जिसके विरोध में यह सभा आयोजित की गई है। रामेश्वर वर्मा ने किसानों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार को इस क्षेत्र के किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदना होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता करती है तो मजदूर, किसान और व्यापारी मिलकर इसका विरोध करेंगे। अखिल भारतीय किसान सभा के मंगेज चौधरी ने कहा कि जिले की अनाज मंडियों की स्थिति बेहद खराब है और गेहूं से अटी पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों ने पहले भी किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर यह साबित किया है कि दोनों वर्ग एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। जहां मजदूरों पर संकट आएगा वहां किसान साथ होगा और जहां किसान पर संकट आएगा वहां मजदूर उनके समर्थन में खड़ा रहेगा। बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि करीब 140 वर्ष पूर्व अमेरिका के शिकागो में मजदूरों ने संघर्ष कर 8 घंटे कार्य दिवस का अधिकार हासिल किया था, लेकिन आज उन अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मजदूरों के अधिकारों पर आंच आई तो मजदूर आंदोलन तेज करेंगे। गोपाल बिश्नोई ने कहा कि सरकार की नीतियां आमजन के हित में नहीं हैं। सुधार के नाम पर अधिकारों को सीमित किया जा रहा है और खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान और मजदूर मिलकर इन नीतियों के खिलाफ देशभर में संघर्ष करेंगे। सभा के अंत में मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सभा को जगजीत सिंह जग्गी, शेर सिंह शाक्य, चन्द्रकला वर्मा, सर्वजीत कौर सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
