संगरिया। भविष्य की पीढ़ी को सर्वाइकल कैंसर जैसी घातक बीमारी से सुरक्षित करने के उद्देश्य से संगरिया ब्लॉक में एक व्यापक टीकाकरण महाअभियान का शुभारंभ किया गया। शुक्रवार को उपखंड अधिकारी जय कौशिक की अध्यक्षता में स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से इस अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, नर्सिंग स्टाफ और प्रशासनिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। इस अवसर पर खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि खिचड़ ने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के खिलाफ लगने वाली वैक्सीन, जो अब तक निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर उपलब्ध थी, अब संगरिया सीएचसी में पूरी तरह निःशुल्क दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त है और विशेष रूप से 14 से 15 वर्ष की आयु की किशोरियों के लिए प्रभावी है। बालिकाएं अपना पंजीकरण करवाकर इस महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का लाभ उठा सकती हैं। चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद शर्मा ने सर्वाइकल कैंसर की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल लगभग 79,000 से अधिक महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित होती हैं, जिनमें से करीब 35,000 महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों में सर्वाइकल कैंसर दूसरा प्रमुख कारण है, जो इस अभियान की आवश्यकता और महत्व को स्पष्ट करता है। अभियान को सफल और व्यापक बनाने के लिए ब्लॉक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को इससे जोड़ा गया है। इसके तहत एक विशेष टीकाकरण शेड्यूल तैयार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक किशोरियों तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और समाजसेवियों से भी इस मिशन में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसडीएम जय कौशिक, तहसीलदार मोनिका बंसल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपनी 14-15 वर्ष की बेटियों का पंजीकरण अवश्य करवाएं, ताकि उन्हें इस जानलेवा बीमारी से समय रहते सुरक्षित किया जा सके। अभियान के पहले दिन संगरिया सीएचसी में शिविर लगाकर पीएम श्री महात्मा गांधी विद्यालय (स्टेट स्कूल) की छात्राओं को टीका लगाया गया। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि इस अभियान के माध्यम से क्षेत्र की प्रत्येक पात्र किशोरी तक पहुंच बनाकर सर्वाइकल कैंसर के खतरे को प्रभावी रूप से कम किया जाए।
