लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में भाजपा और सहयोगी दलों के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला आरक्षण बिल को लेकर सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन बिल को पारित कराने में विपक्षी दलों ने बाधा डाली। सीएम योगी ने कहा कि वर्तमान में संसद में महिला सांसदों की संख्या 78 है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस और सपा ने इसमें रुकावट पैदा की। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि “गेस्ट हाउस कांड” के पाप धोने का मौका था, लेकिन पार्टी ने इसका विरोध किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मंजूरी मिली थी और इसे 2029 से लागू करने के लिए संशोधन बिल लाया गया था। इसके लिए संसद का विशेष सत्र भी बुलाया गया। योगी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों को आश्वस्त किया था कि उनके अधिकारों में कोई कटौती नहीं होगी। सीएम ने संसद में विपक्ष के व्यवहार की आलोचना करते हुए इसे “द्रौपदी के चीरहरण जैसा” बताया और कहा कि इस्तेमाल की गई भाषा बेहद आपत्तिजनक थी। उन्होंने कहा कि यूपी की महिलाओं में सपा और कांग्रेस के खिलाफ गहरा आक्रोश है और “आधी आबादी” इन दलों को माफ नहीं करेगी। योगी आदित्यनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दल महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ने से रोकना चाहते हैं और उनका आचरण नारी विरोधी रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश में चार प्रमुख वर्ग—नारी, गरीब, युवा और किसान—की बात की है, लेकिन विपक्ष ने हर प्रगतिशील कदम का विरोध किया। सपा पर मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग उठाने को लेकर भी योगी ने सवाल उठाए और कहा कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने शाह बानो केस और तीन तलाक कानून का हवाला देते हुए विपक्ष पर दोहरे आचरण का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए व्यापक काम हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 26 लाख बेटियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 17 अप्रैल को “काला दिवस” के रूप में याद किया जाएगा, जब महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने का मौका गंवा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन की “महिला विरोधी मानसिकता” के कारण बिल पारित नहीं हो सका। अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से लंबित इस बिल को लागू कर महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना चाहते थे, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे विफल कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका राजनीतिक खामियाजा सपा, कांग्रेस और अन्य दलों को भुगतना पड़ेगा।
