हनुमानगढ़। भारतीय किसान संघ ने पीलीबंगा तहसील के बड़ोपल बारानी क्षेत्र की लगभग 8000 बीघा जीडीसी (सिंचाई विभाग) भूमि को वन विभाग को डिम्ड फॉरेस्ट घोषित करने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। संघ के जिला मंत्री हरीश पचार ने बताया कि पीलीबंगा तहसील के बड़ोपल बारानी क्षेत्र में स्थित जीडीसी की लगभग 8000 बीघा भूमि को वन विभाग अपने अधीन लेने की प्रक्रिया में है। लेकिन इन खसरों के बीच लगभग 500 किसानों की खातेदारी भूमि भी स्थित है, जिनकी जोतें अत्यंत छोटी हैं और उनके पास अन्यत्र कोई जमीन या आजीविका का साधन उपलब्ध नहीं है। यदि जीडीसी की भूमि वन विभाग को सौंप दी जाती है तो किसानों के सामने कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न होंगी।

इनमें खेतों तक पहुंचने के रास्तों का अभाव, विद्युत लाइनों से जुड़ी दिक्कतें, निराश्रित पशुओं की समस्या, सिंचाई व्यवस्था में बाधा तथा तारबंदी और सुरक्षा संबंधी विवाद शामिल हैं। संघ के पीलीबंगा तहसील अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंवर ने बताया कि लगभग प्रत्येक खसरे में किसानों की थोड़ी-थोड़ी भूमि स्थित है। ऐसे में क्षेत्र को वन घोषित करने से किसानों और विभाग के बीच रोजाना टकराव की स्थिति बन सकती है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि इस क्षेत्र में कभी अत्यधिक बाढ़ का पानी आता है तो कभी कई वर्षां तक पानी नहीं पहुंचता, बावजूद इसके किसानों ने कभी पानी को लेकर विरोध नहीं किया। क्षेत्र के किसान पहले से ही मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पिछड़े हुए हैं और कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे हैं।
विकास और विस्थापन का विरोधाभास
भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि एक ओर सरकार स्कूल, सड़कें और विद्युत कनेक्शन जैसी विकास योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर इस निर्णय से किसानों को उजाड़ने की आशंका उत्पन्न हो रही है। संघ की ओर से जिला कलक्टर से मांग की गई है कि किसानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उक्त भूमि को वन विभाग को न दिया जाए और किसानों को उजड़ने से बचाते हुए राहत प्रदान की जाए।
