जयपुर। राजस्थान रोडवेज के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने निजीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को राजधानी जयपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने जयपुर डिपो से रोडवेज मुख्यालय तक रैली निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बाद में मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्प्लाइज यूनियन (एटक) के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में रोडवेज कर्मी शामिल हुए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभाग में लगातार निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित होता जा रहा है। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष एमएल यादव ने बताया कि एक समय रोडवेज के पास करीब साढ़े 5 हजार बसें थीं, जो अब घटकर लगभग 2 हजार रह गई हैं। साथ ही कर्मचारियों की संख्या में भी भारी कमी आई है, जिसके चलते मौजूदा स्टाफ पर अतिरिक्त कार्यभार डाला जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ड्राइवर और कंडक्टर से 12 से 15 घंटे तक काम लिया जा रहा है, जबकि नियमानुसार कार्य अवधि 8 घंटे निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जा रहा और न ही पर्याप्त अवकाश दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि यह स्थिति मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट-1969 का उल्लंघन है। वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाइट अलाउंस, ओवरड्यू और जीएच के भुगतान भी पिछले सात वर्षों से लंबित हैं। प्रदर्शनकारियों ने नई बसों की खरीद, रिक्त पदों पर भर्ती और बकाया भुगतान जल्द करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
