लखनऊ। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महिला आरक्षण, कानून व्यवस्था, महंगाई और बुनियादी ढांचे के मुद्दों को लेकर सरकार की नीयत और कार्यशैली पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने कहा कि विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को सुनते हुए उन्हें लगा कि भाजपा यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं को वास्तविक आरक्षण देना नहीं चाहती और “नारी वंदन” को केवल नारे तक सीमित रखना चाहती है। सीएम के “गिरगिट” वाले बयान पर पलटवार करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि असली रंग बदलने का काम भाजपा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की “साजिश” विफल हो चुकी है, इसलिए अब वह विधानसभा में प्रस्ताव लाकर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की भाषा और राजनीति दोनों “गिरगिटी” हो चुकी हैं।महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं और कानून व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली के कारण लोगों का न्यायिक संस्थाओं पर भरोसा कम हो रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठाते हुए उन्होंने गंगा एक्सप्रेस-वे का उदाहरण दिया। यादव ने कहा कि उद्घाटन के बाद एक्सप्रेस-वे को बंद करना पड़ा, जो सरकार की जल्दबाजी और अधूरी तैयारियों को दर्शाता है। उन्होंने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि से आम लोगों की रसोई पर सीधा असर पड़ा है और जीवनयापन महंगा होता जा रहा है। पश्चिम बंगाल के संदर्भ में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों में केंद्रीय एजेंसियों और “पैरलल स्ट्रक्चर” का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करती है। उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों के बावजूद वहां जनता भाजपा को जवाब देगी। पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर भी सपा प्रमुख ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को नदियों, जंगलों और पर्यावरण की चिंता नहीं है और वह केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है। मेरठ-अयोध्या मास्टर प्लान में बार-बार बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे उद्योगपतियों के हितों से जोड़कर देखा। अंत में, अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण विधेयक के समय और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के बीच संसद सत्र बुलाना एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसका उद्देश्य विपक्ष को प्रचार से रोकना और उसे बदनाम करना था।
