नई दिल्ली। लोकसभा में संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयकों पर चर्चा के दौरान नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है और महिलाओं को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन किसी भी तरह का मनमाना परिसीमन स्वीकार नहीं होगा, जो दलित, आदिवासी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के हितों को प्रभावित करता हो। बेनीवाल ने डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि “जिसकी जितनी संख्या भारी है, उसे उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना व्यापक चर्चा और जन-सहमति के संवैधानिक बदलाव करने की कोशिश कर रही है, जो देश की मूल भावना के विपरीत है। सांसद ने असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन का उदाहरण देते हुए विधेयकों की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित व्यवस्था है, जिसे वर्तमान सरकार कमजोर कर रही है। राजस्थान का पक्ष रखते हुए बेनीवाल ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 48 लोकसभा सीटें होनी चाहिए, लेकिन प्रस्तावित बदलावों से लगभग 10 सीटों का नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों और संघीय ढांचे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार ने जातिगत जनगणना के बाद ठोस कदम उठाने के बजाय बिना राज्यों और राजनीतिक दलों से संवाद किए जल्दबाजी में ये विधेयक पेश किए हैं। अंत में बेनीवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के समय इस तरह के विधेयक लाना केवल दिखावे की राजनीति है। यदि सरकार गंभीर होती तो जातिगत जनगणना के आधार पर ओबीसी वर्ग को आरक्षण और एससी-एसटी सीटों में वृद्धि करती।
