चारणवासी। गांव रतनपुरा स्थित श्रीकृष्ण गोशाला परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत गांव के हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके पश्चात कथावाचक कृष्णानंद महाराज, बाबा महेश नाथ एवं प्रशासक जिंदर पाल गोदारा की अगुवाई में कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में आगे पुरुष श्रद्धालु भगवा ध्वज थामे “हर घर भगवा छाएगा, राम राज्य अब आएगा” के उद्घोष के साथ आगे बढ़े, वहीं पीछे 501 मातृशक्ति सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाती हुई चल रही थीं। श्रद्धालुओं के “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा। डीजे पर बज रहे राधा-कृष्ण भजनों, विशेषकर “अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम” और “मीठे रस से भरयोरी राधा रानी लागे” की मधुर धुनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।आयोजकों ने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए प्रत्येक कलश पर चार-चार हरे पीपल के पत्ते रखवाए।

इस पहल के माध्यम से जल, वायु और हरियाली के महत्व को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। यात्रा मार्ग में ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। मुख्य यजमान के रूप में सेवानिवृत्त सैनिक रमेश शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी रजनी शर्मा ने प्रधान कलश धारण कर धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। कथा पांडाल पहुंचने पर सभी कलशों की विधिपूर्वक पूजा की गई तथा दीप प्रज्वलन एवं महाआरती के साथ कथा का विधिवत श्रीगणेश हुआ। कथावाचक ने कलश के धार्मिक महत्व का वर्णन करते हुए बताया कि शास्त्रों के अनुसार कलश के मुख में भगवान विष्णु, कंठ में भगवान शिव और मूल में ब्रह्मा का वास माना गया है। मध्य भाग में मातृशक्तियों का निवास तथा कलशस्थ जल में समस्त पवित्र नदियों और समुद्रों का वास माना जाता है। उन्होंने कहा कि कलश घर की नकारात्मक ऊर्जा को शोषित कर वातावरण में शुद्धता और शांति का संचार करता है। बाबा महेश नाथ ने अपने प्रवचनों में गौसेवा को हिंदू धर्म की धुरी बताते हुए कहा कि गौपालन आध्यात्मिक उन्नति एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि का आधार है। गोशाला अध्यक्ष कृष्ण शर्मा ने बताया कि कथा 23 फरवरी से 1 मार्च तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित होगी। 1 मार्च को पूर्णाहुति के साथ हवन-यज्ञ संपन्न होगा, जिसके पश्चात महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा।
